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चुनाव में कांग्रेस का बड़ा वादा, 2500 रुपए महीना देने का ऐलान

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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने बड़ा वादा किया है। आम आदमी पार्टी के बाद अब कांग्रेस ने दिल्ली की महिलाओं के लिए 2500 रुपए हर महीने देने का वादा किया है। ‘आप’ की ‘महिला सम्मान’ योजना के सामने कांग्रेस ने ‘प्यारी दीदी’ योजना का लाने का वादा किया है। इस योजना के तहत दिल्ली में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए दिए जाएंगे।

बता दें कि आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले दिल्ली की महिलाओं के लिए महिला सम्मान योजना के तहत 2100 रुपए देने का वादा किया है। इसका ऐलान दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल ने किया था। अब कांग्रेस ने भी महिला वोटरों को लुभाने के लिए ‘प्यारी दीदी योजना’ के तहत दिल्ली की महिलाओं को 2500 रुपए हर महीना देने का वादा किया है। सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली कांग्रेस के नेताओं ने प्यारी दीदी योजना के तहत दिल्ली में सरकार बनने के बाद महिलाओं को 2500 रुपए देने का वादा किया है।

इससे पहले साल 2023 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने महिलाओं के लिए खातों में पैसे देने का वादा किया था। उस साल सरकार बनने के बाद से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ‘गृह लक्ष्मी योजना’ के तहत महिलाओं को 2000 रुपए हर महीने महिलाओं के खातों में भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने एक और योजना का ऐलान किया था, जिसके तहत महिलाओं को गैस सिलेंडर भी दिया जा रहा है। इसकी जानकारी सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी।

दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी लगातार घोषणाएं कर रही है। दिल्ली की महिलाओं के लिए महिला सम्मान योजना के साथ ही आम आदमी पार्टी ने दलित छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई के लिए पूरा खर्च उठाने का वादा भी किया है। इसके अलावा भी आम आदमी पार्टी ने कई वादे किए हैं।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने वादा किया कि दिल्ली में कांग्रेस के सत्ता में आने पर नयी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में इसे लागू किया जाएगा।

शिवकुमार ने कहा कि आज मैं यहां ‘प्यारी दीदी योजना’ की शुरुआत करने आया हूं। हमें विश्वास है कि दिल्ली में कांग्रेस की सरकार बनेगी और नए मंत्रिमंडल के पहले दिन हम राजधानी की प्रत्येक महिला को 2,500 रुपये देने की योजना लागू करेंगे। शिवकुमार ने कहा कि ‘कर्नाटक मॉडल’ के मुताबिक दिल्ली में भी गारंटी लागू की जाएगी। दिल्ली में 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव फरवरी में होने वाले हैं। इस घोषणा के दौरान कांग्रेस की दिल्ली इकाई के प्रमुख देवेंद्र यादव, पार्टी के दिल्ली प्रभारी काजी निजामुद्दीन और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।