नई दिल्ली। नया दौर, नई पहचान! जहां कभी महिलाओं को सीमित भूमिकाओं में देखा जाता था, आज वे हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। चाहे वह बिजनेस हो, खेल जगत, विज्ञान, तकनीक या फिर सुरक्षा बल, महिलाओं ने अपनी काबिलियत और मेहनत से खुद को साबित किया है। आज हम आपको बताएंगे कैसे भारत की बेटियां हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे निकल रही हैं और एक नई मिसाल कायम कर रही हैं। यह सिर्फ सशक्तिकरण की नहीं, बल्कि नए भारत की कहानी है

यूनिवर्सल वुमन इंडिया (2024) पेजेंट एंड पर्सनैलिटी ग्रूमिंग कोच अपेक्षा डबराल ने अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा की, जिसमें उन्होंने मध्यप्रदेश के भोपाल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। मध्य प्रदेश के भोपाल में जन्मी अपेक्षा का सपना था डॉक्टर बनना, लेकिन नियति ने उन्हें एविएशन इंडस्ट्री की ओर मोड़ दिया। उन्होंने एयर डेक्कन में एक फ्लाइट अटेंडेंट के रूप में करियर की शुरुआत की और आगे कतर एयरवेज में काम करते हुए दुनियाभर की संस्कृतियों को समझने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्होंने इंटरपर्सनल स्किल्स और सॉफ्ट स्किल्स की अहमियत को महसूस किया, जिसने उनके व्यक्तित्व को और निखारा।
अपने 10 साल के उड़ान करियर के बाद, उन्होंने किंगफिशर एयरलाइंस में इंटरनेशनल सर्विसेज ट्रेनर के रूप में काम किया और फिर अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश लौटने का निर्णय लिया। भोपाल में आकर उन्होंने ग्रूमिंग, बॉडी लैंग्वेज, और सॉफ्ट स्किल्स की ट्रेनिंग देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम शुरू की। लेकिन उनकी यात्रा यहीं नहीं रुकी। उन्होंने मिसेस मध्य प्रदेश और मिसेस इंडिया का खिताब जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की और फिर 2024 में कंबोडिया में आयोजित यूनिवर्सल वुमन इंडिया पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ उन्हें “बेस्ट इंटरनेशनल सोशल प्रोजेक्ट” अवार्ड से सम्मानित किया गया।
आज अपेक्षा डबराल न केवल एक सफल ट्रेनर और मेंटर हैं, बल्कि मनोरंजन जगत में भी सक्रिय हैं। उन्होंने दो वेब सीरीज़ में काम किया है और एक फिल्म में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उनकी सफलता की कहानी युवा महिलाओं और पुरुषों के लिए एक प्रेरणा है। उनका मानना है कि निरंतर प्रयास, ज्ञान अर्जन और सही दृष्टिकोण के साथ कोई भी अपने सपनों को साकार कर सकता है। वे सभी युवाओं को यही संदेश देती हैं कि सफलता कोई मंज़िल नहीं, बल्कि एक सतत यात्रा है, जिसे अनुशासन और मेहनत के साथ तय किया जाना चाहिए।

गुड़गांव की उद्यमी सोना कपूर ने अपने स्टार्टअप “सोनाज़ क्रिएशन” के जरिए पर्यावरण-संवेदनशील और अनोखे उत्पादों की दुनिया में कदम रखा है। पेपर क्राफ्टिंग के जरिए बनाई जाने वाली हैंडबैग, डस्टबिन, लांड्री बास्केट और अन्य उपयोगी वस्तुएं लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। यह व्यवसाय उनकी हॉबी से शुरू हुआ, लेकिन जब उनके बनाए उत्पादों को सराहना मिलने लगी, तो उन्होंने इसे प्रोफेशनल स्तर पर आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
सोना कपूर ने अपने पति के सहयोग से इस बिजनेस को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लॉन्च किया और अब यह अमेज़ॅन, फ्लिपकार्ट और उनकी खुद की वेबसाइट pepers.in पर उपलब्ध है। इस स्टार्टअप का मकसद न केवल सस्टेनेबल उत्पाद तैयार करना है, बल्कि समाज के वंचित वर्गों को रोजगार देना भी है। उनके वर्कशॉप में ब्लाइंड लोगों और अंडरप्रिविलेज्ड लड़कियों को काम करने का मौका दिया जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है।
अब यह स्टार्टअप न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहा है। अमेरिका में निर्यात की शुरुआत हो चुकी है, और आने वाले समय में इसे और देशों में विस्तारित करने की योजना है। इस पहल के जरिए सोना कपूर एक मिसाल पेश कर रही हैं कि कैसे एक छोटे से आइडिया को मेहनत और सही रणनीति के साथ एक सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है, जो पर्यावरण और समाज दोनों के लिए फायदेमंद हो।

भोपाल की उद्यमी रैना मिश्रा ने 2014 में अपने पति के साथ मिलकर ‘सीगल वेंचर’ की नींव रखी, जो आज डिजिटल मार्केटिंग और आईटी सॉल्यूशन्स के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है। शुरुआत में छोटे प्रोजेक्ट्स, ऐप और वेबसाइट डेवलपमेंट के माध्यम से कंपनी ने अपनी पहचान बनाई, लेकिन 2021 में इसे आधिकारिक रूप से ‘सीगल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड’ के रूप में पंजीकृत किया गया। COVID-19 के दौरान, जब कई व्यवसाय प्रभावित हुए, तब भी उन्होंने घर से ही काम जारी रखा और अपने नेटवर्क के सहयोग से नए अवसरों को तलाशा।
सीगल वेंचर का ‘हाइपर ग्रोथ मॉडल’ छोटे व्यवसायों और महिला उद्यमियों को 10X ग्रोथ हासिल करने में मदद करता है। यह कंपनी उन्हें बिजनेस मॉडल डेवलपमेंट, सरकारी योजनाओं से लाभ दिलाने, लीगल डाक्यूमेंटेशन, टेक्नोलॉजी एक्विजिशन, मार्केट रिसर्च और फंड रेज़िंग जैसी सेवाएं प्रदान करती है। खास बात यह है कि कंपनी अपने संभावित ग्राहकों को पहली सेवा मुफ्त में उपलब्ध कराती है, ताकि वे बिजनेस की सही जरूरतों को समझ सकें। वर्तमान में कंपनी में लगभग 40 कर्मचारी कार्यरत हैं और भोपाल के अलावा गाडरवारा में भी इसका संचालन हो रहा है, जहां महिलाओं को रोजगार देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
रैना मिश्रा और उनकी टीम का विजन भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सेवाओं का विस्तार करना है। उनके क्लाइंट ऑस्ट्रेलिया और दुबई जैसे देशों में भी मौजूद हैं। अब वे सरकारी सहयोग से अपने स्टार्टअप को और ऊंचाइयों तक ले जाना चाहती हैं, जिससे न केवल उनकी कंपनी बल्कि उनके साथ काम करने वाले लोग भी आगे बढ़ सकें। डिजिटल और आईटी क्षेत्र में नवाचार लाने की उनकी इस पहल से सीगल वेंचर को एक प्रमुख बिजनेस सॉल्यूशन प्रोवाइडर बनने की ओर अग्रसर किया जा रहा है।

भोपाल की रहने वाली ज्योति परिहार ने पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक चुनौतियों के बीच अपने सपने को साकार करते हुए ‘काशी वस्त्रम’ की नींव रखी। एक वर्किंग वुमन और उद्यमी के रूप में उन्होंने घर से ही अपने फैशन डिज़ाइनिंग के हुनर को निखारना शुरू किया। छोटे बच्चों की परवरिश के साथ-साथ उन्होंने अपने व्यवसाय को भी संतुलित रूप से आगे बढ़ाया। अक्सर समाज और परिवार से यह सवाल उठते थे कि वह घर और काम के बीच संतुलन कैसे बना पाती हैं, लेकिन उन्होंने अपने समय प्रबंधन से यह साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति और मेहनत से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
ज्योति परिहार ने 2019 में ‘मिसेज भोपाल’ का खिताब जीतकर अपने मॉडलिंग करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘मिस एंड मिसेज सेंट्रल इंडिया’ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और ‘मिसेज ब्यूटी विद अ पर्पस’ और ‘मिसेज टैलेंटेड’ के खिताब अपने नाम किए। अपने बचपन के फैशन और ड्रेस डिज़ाइनिंग के शौक को उन्होंने एक व्यवसाय में बदला और बिना किसी औपचारिक कोर्स के ही खुद के डिज़ाइन तैयार करने लगीं। पहले उन्होंने अपने लिए कपड़े डिज़ाइन किए, जिसे सराहना मिली और धीरे-धीरे अन्य लोगों के लिए भी वे परिधान तैयार करने लगीं। उनके डिज़ाइन्स को विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों और रेजीमेंट्स के लिए भी अपनाया गया।
ज्योति परिहार का मानना है कि मध्य प्रदेश में अब मॉडलिंग और फैशन डिज़ाइनिंग के लिए नए अवसर बढ़ रहे हैं। मुंबई जैसे बड़े शहरों की तुलना में अभी सुधार की जरूरत है, लेकिन महिलाओं में जागरूकता बढ़ रही है और नए प्लेटफॉर्म्स खुल रहे हैं। उनका सपना है कि ‘काशी वस्त्रम’ को एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले और उनके डिज़ाइन्स देशभर में लोकप्रिय हों। उनके इस सफर ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, आत्मविश्वास और जुनून से हर महिला अपने सपनों को साकार कर सकती है।

अहमदाबाद की उद्यमी अदिति माली ने कोविड-19 महामारी के दौरान 2021 में अपनी कंपनी “माली ग्रीन्स” की शुरुआत की। वे एक विजिटिंग फैकल्टी हैं और अहमदाबाद के प्रतिष्ठित संस्थानों में अर्बन एग्रीकल्चर पढ़ाती हैं। अपने छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देने के लिए उन्होंने माइक्रोग्रीन्स उगाने की पहल की, जिससे उन्हें न केवल शहरी खेती का अनुभव मिला बल्कि पोषण संबंधी लाभ भी समझने का अवसर मिला। महामारी के दौरान जब लोगों को ताजा सब्जियां प्राप्त करने में कठिनाई हो रही थी, तब उनके परिवार और मित्रों ने उनसे माइक्रोग्रीन्स उगाने का अनुरोध किया, जिससे उनका व्यवसायिक सफर शुरू हुआ।
अदिति ने अपने घर के एक खाली कमरे से माइक्रोग्रीन्स उगाना शुरू किया और जल्द ही उनकी गुणवत्ता और पोषण मूल्य के कारण यह उत्पाद बाजार में लोकप्रिय हो गया। शुरुआत में उन्होंने सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाया, जिसमें ग्राहकों को हर हफ्ते ताजा माइक्रोग्रीन्स घर पहुंचाए जाते थे। हालांकि, इस नए बिजनेस मॉडल को लोगों तक पहुंचाना और इसकी जागरूकता फैलाना एक चुनौती थी। उन्होंने विभिन्न फार्मर्स मार्केट और सात्विक फूड फेस्टिवल में भाग लिया, जिससे उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिली। धीरे-धीरे, अहमदाबाद के लोग भी माइक्रोग्रीन्स को अपनाने लगे, जो पहले सिर्फ बड़े शहरों में लोकप्रिय थे।
आज, “माली ग्रीन्स” 80 से अधिक रेस्टोरेंट्स को माइक्रोग्रीन्स की सप्लाई कर रहा है और 100 से अधिक घरों में नियमित रूप से इसकी डिलीवरी की जा रही है। अदिति ने अपने बिजनेस को और विस्तार देते हुए स्थानीय किसानों को कॉन्ट्रैक्ट पर लिया है, जिससे वे न केवल माइक्रोग्रीन्स बल्कि 80 से अधिक दुर्लभ और विदेशी सब्जियां भी उगा रही हैं। उनका बिजनेस मॉडल न केवल पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है बल्कि महिलाओं को रोजगार देकर सामाजिक उत्थान में भी योगदान देता है। उनकी इस सफलता ने अहमदाबाद में अर्बन फार्मिंग को नई दिशा दी है।
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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी
जब पेरेंट्स अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूल भेजते हैं, तो उनकी प्राथमिक अपेक्षा होती है कि बच्चों को मजेदार तरीके से सीखने का अवसर मिले। छोटे बच्चों का दिमाग पहले आनंद लेना चाहता है। अगर उन्हें मजा नहीं आएगा, तो वे आगे नहीं बढ़ेंगे। हर बच्चे के अंदर प्रतिभा होती है, जरूरी है हम उसे समझें।
बच्चों के स्कूल जाने से पहले पेरेंट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए। यह समझना ज़रूरी है कि आपके बच्चे को क्या चाहिए, और उसी के आधार पर स्कूल का चयन करें। ऐसा स्कूल चुनें जिसमें खुला क्षेत्र हो और स्टाफ बच्चों की समस्याओं को हल करने में सक्षम हो। स्कूल और उसकी फैकल्टी बच्चों को संतुष्ट करने में भी सक्षम होना चाहिए।




