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EVM बैटरी पर कांग्रेस की नजर, आप ने लॉन्च किया पोर्टल, BJP का पलटवार

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नई दिल्ली। दिल्ली में चुनाव प्रचार थमने के बाद राजनीतिक दलों ने बूथ प्रबंधन के तहत ज्यादा से ज्यादा वोट अपने पक्ष में डलवाने के लिए पोलिंग एजेंट की तैनाती शुरू कर दी है। आम आदमी पार्टी ने भी मंगलवार को ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में पोलिंग एजेंट लगा दिए। चुनाव में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए आप ने इस बार पोलिंग एजेंट को प्रशिक्षण दिया है।

पारदर्शिता के लिए एक वेब पोर्टल भी लॉन्च
आम आदमी पार्टी ने पारदर्शिता के लिए एक वेब पोर्टल भी लॉन्च कर रही है, जहां पर मतदान वाले दिन पोलिंग एजेंट के जरिए मिले सभी ब्योरे को पांच फरवरी की रात में उस वेब पोर्टल पर डाला जाएगा। आप का कहना है कि ऐसा इसलिए कर रहे हैं जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि डाले गए सही वोटों की ही मतगणना की जाए। वहीं, आप नेताओं ने आशंका जताई कि इस बार गड़बड़ी की जा सकती है, इसलिए उन्होंने इसे रोकने की पूरी तैयारी की हैं।

ईवीएम की बैटरी पर कांग्रेस की नजर
मतदान के लिए कांग्रेस ने अपनी सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। बीते तीन दिनों से साढ़े सात हजार से ज्यादा बूथ कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा था। खासतौर पर पोलिंग एजेंट को वोटिंग के बाद निकलने वाली वीवी पैट पर्ची से लेकर मशीन की बैटरी पर भी नजर रखने का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, पार्टी के वार रूम के साथ सभी कार्यकर्ताओं का सीधा संपर्क भी बना रहेगा।

कांग्रेस पिछले दो विधानसभा चुनावों में खाता तक नहीं खोल सकी थी। इसके चलते इस बार पार्टी की ओर से पूरी जोर-आजमाइश की जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से भी इस बार चुनाव प्रचार के अंतिम कुछ दिनों में पूरी ताकत झोंकी गई, जिसके चलते कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह भी बना हुआ है। सोमवार शाम चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद से ही पार्टी का बूथ प्रबंधन पर ध्यान है।

मत प्रतिशत बढ़ाने पर भाजपा का जोर
भाजपा ने मतदान बढ़ाने को लेकर मंगलवार को विधानसभावार बैठक की। करीब 70 हजार कार्यकर्ताओं को 2,629 मतदान केंद्रों पर लगाया गया है। पन्ना प्रमुख से लेकर राष्ट्रीय पदाधिकारियों को मतदान बढ़ाने के काम पर लगाया गया है। भाजपा के साथ-साथ आरएसएस भी इस कवायद में जुटा है।

भाजपा पदाधिकारियों ने बूथ पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को बताया गया कि ज्यादा से ज्यादा मतदान उनका लक्ष्य है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, करीब 70 हजार कार्यकर्ताओं को बूथ मैनेजमेंट में उतारा गया है। आरएसएस ने छोटी-छोटी बैठकें करके मतदान बढ़ाने को लेकर अपने कार्यकर्ताओं को सुझाव दिए। पार्टी नेताओं का मानना है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत 50 फीसदी से ऊपर चला जाता है। ऐसे में अगर ज्यादा मतदान का प्रयास होगा तो भाजपा को इसका लाभ होगा। इसके साथ बीएलओ सूची में शामिल सभी वोट को भाजपा नेता मतदान की मांग कर रहे हैं। इसे भी बूथ मैनेजमेंट में लगे कार्यकर्ताओं को समझाया गया है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।