db News Network

Home » फैक्टरी में पहुंचे राहुल गांधी, व्यापार में आ रही परेशानियों के बारे में पूछा

फैक्टरी में पहुंचे राहुल गांधी, व्यापार में आ रही परेशानियों के बारे में पूछा

0 comments 87 views 2 minutes read

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी नारनौल के फैशन डिजाइनर विक्की सैनी की फैक्टरी में पहुंचे। विक्की सैनी ने 2016-17 में दिल्ली के हौज खास के पास शाहपुर जाट में फैक्टरी लगाई थी। जिसमें करीब 40 कारीगर कार्य भी कर रहे हैं। अब उनकी फैक्टरी में पांच अप्रैल को राहुल गांधी ने पहुंच कर अनेक मुद्दों पर चर्चा की। बता दें कि राहुल गांधी ओबीसी वर्ग से जुड़े ऐसे व्यापारियों को लेकर सर्वे कर रहे हैं, जिन्होंने जीरो से अपना कारोबार शुरू किया है।

इस दौरान राहुल गांधी ने विक्की सैनी से पूछा कि ओबीसी के कितने लोग इस फील्ड में हैं। साथ ही इस कार्य में क्या-क्या परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां तक राहुल गांधी ने कपड़े की कटिंग भी की। जिसका अब उन्होंने वीडियो जारी किया है। राहुल गांधी ने पूछा कि आप ने काम कहां से शुरू किया? विक्की सैनी ने कहा कि उसने जीरो लेवल से कार्य शुरू किया। उसने टीवी पर देखकर फैशन डिजाइनिंग में आने की सोची। राहुल गांधी ने पूछा कि आपका मिशन क्या है तो विक्की ने कहा कि उसे मिडिल क्लास से हायर बनना है।

राहुल गांधी ने कहा कि जो कार्य कर रहा है उसे वैल्यू नहीं मिल रही है और बिचौलिया पहले लाभ उठा रहा है। इस नेटवर्क में जिसकी पहुंच है वह सारा फायदा उठा रहे हैं। आपका 20 हजार में बिकेगा, वहीं दूसरा पांच लाख में बेच रहा है। हुनर में फर्क नहीं है, लेकिन सारा प्रॉफिट कोई ओर उठा रहा है।

राहुल गांधी ने कहा कि बिना पहुंच के देश में कोई काम नहीं होता। जिसकी वजह से व्यापारी को पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। वह ऐसा सिस्टम चाहते हैं कि लोगों का काम बिना पहुंच के बन जाएं।

विक्की सैनी ने राहुल गांधी से कहा कि हमारे पास हुनर है, लेकिन बेहतर प्लेटफार्म नहीं मिल पा रहा है। जिस पर राहुल ने कहा आप लोगों को भी उसमें जगह मिलनी चाहिए।

नारनौल के मोहल्ला नलापुर में विक्की सैनी का जन्म हुआ था। उनके पिता उदमीराम सैनी की नई और पुरानी सब्जी मंडी में दुकानें हैं। लेकिन विक्की ने हटकर कुछ करने की ठानी और अब दिल्ली में फैक्टरी लगाकर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

उदमीराम सैनी ने बताया कि उसके दो लड़के हैं। उसके बड़े लड़के ने फैशन डिजाइनर का कोर्स किया था। जिसके बाद वह दिल्ली में ही रहकर अपना कार्य कर रहा है। फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में बेटे ने जो सफलता हासिल की है, उससे क्षेत्र का मान बढ़ा है और उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। यह बड़े गर्व की बात है कि राहुल गांधी जैसे नेता उनकी फैक्टरी पर आए और उनके बेटे की हौसला अफजाई की।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।