db News Network

Home » भाजपा सांसद ने कांग्रेस नेता के पॉडकास्ट की गिनाईं गलतियां

भाजपा सांसद ने कांग्रेस नेता के पॉडकास्ट की गिनाईं गलतियां

0 comments 59 views 2 minutes read

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक यूट्यूब वीडियो में दिए गए बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। जहां उन्होंने एक पॉडकास्ट कहा कि महात्मा गांधी को यू.के. (इंग्लैंड) में ट्रेन से फेंका गया था, जिसके बाद उनके परदादा और उनके चचेरे भाइयों ने बदला लिया। राहुल गांधी के इस बयान पर लगातार रूप से प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इसी बीच भाजपा सांसद लहर सिंह सिरोया ने इस बयान को लेकर राहुल गांधी पर तीखा कटाक्ष किया है। साथ ही कहा कि कोई भी व्यक्ति राहुल गांधी से इतिहास ना सिखा।

बता दें कि राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर डाले एक वीडियो में महात्मा गांधी और पंडित नेहरू की भूमिका का जिक्र करते हुए अपने राजनीतिक सफर को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि गांधी जी के साथ जो हुआ, वह उनके परिवार के लिए प्रेरणा बना। लेकिन भाजपा सांसद लहर सिंह सिरोया ने सोशल मीडिया प्लटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि महात्मा गांधी को इंग्लैंड में नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से फेंका गया था। उन्होंने कहा कि यह सुनकर मैं बहुत निराश हुआ। यहां तक कि एक सामान्य पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी जानता है कि 1893 में गांधी जी को डरबन से प्रिटोरिया जाते वक्त ट्रेन से निकाला गया था, इंग्लैंड में नहीं।

भाजपा सांसद ने आगे दावा किया उन्होंने वीडियो को रिकॉर्ड कर लिया है ताकि बाद में राहुल गांधी या उनकी टीम इसे एडिट कर न सके। उन्होंने यूट्यूब का ऑटो कैप्शन भी सेव किया है जिसमें राहुल के शब्द स्पष्ट सुने जा सकते हैं। सिरोया ने आगे तंज कसते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति राहुल जी से इतिहास नहीं सीखे। दुख की बात है कि नेहरू सेंटर के लोग और कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने वीडियो जारी करने से पहले इस गलती को नहीं सुधारा।

राहुल गांधी ने वीडियो में यह भी कहा कि उनके परदादा (नेहरू) और उनके चचेरे भाई गांधी जी के साथ हुए अपमान का बदला लेने के लिए इलाहाबाद रेलवे स्टेशन गए थे और अंग्रेजों को ट्रेन से निकाला। इस पर सिरोया ने व्यंग्य करते हुए कहा कि 1893 में नेहरू जी केवल 4 साल के थे। क्या 4 साल का बच्चा वाकई जाकर विरोध करेगा?

गौरतलब है कि इस वीडियो में राहुल गांधी के साथ दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित बातचीत कर रहे थे। यह बातचीत नेहरू सेंटर के लिए रिकॉर्ड की गई थी, जिसमें राहुल गांधी ने पंडित नेहरू को केवल नेता नहीं बल्कि एक साधक और विचारक बताया। उन्होंने कहा कि उनके परदादा की “सत्य की खोज” ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।