db News Network

Home » प्रदेश के सभी अंचलों में समान रूप से उद्यमिता का हो विस्तार : CM

प्रदेश के सभी अंचलों में समान रूप से उद्यमिता का हो विस्तार : CM

0 comments 73 views 3 minutes read

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के माध्यम से प्रत्येक परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को रोजगार अथवा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जा सकते हैं। प्रत्येक जिले की परिस्थिति और उपलब्ध दक्षता के अनुसार गतिविधियों का विस्तार किया जाये। तेल घानी, मसाला-आटा चक्की, कोदो-कुटकी व अन्य मिलेट की प्र-संस्करण इकाई जैसे सूक्ष्म उद्योगों से युवाओं को जोड़ते हुए सम्पूर्ण प्रदेश में समान रूप से उद्यमिता का विस्तार किया जाये। इसमें खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। कृषि उपज मंडियों को भी आधुनिक स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। इसमें दूध, सब्जी आदि को सुरक्षित रखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, इसकी शुरूआत रतलाम से होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की समीक्षा बैठक में दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत-विकसित मध्यप्रदेश की संकल्पना को साकार करने में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से सूक्ष्म स्तर पर उद्यमिता को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश वर्तमान में देश में 7वें स्थान पर है, अगले वर्ष तक हमें प्रदेश को देश के श्रेष्ठतम राज्यों में स्थान दिलाना है। एमएसएमई के लिए उचित वित्त-व्यवस्था और अधोसंरचना, स्वरोजगार योजनाओं और स्टार्ट-अप ईको सिस्टम को सशक्त करते हुए बेहतर विपणन, निर्यात व ई-कॉमर्स प्लेटफार्म के माध्यम से इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समय-सीमा निर्धारित कर गतिविधियां संचालित की जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष-2025 को उद्योग और रोजगार वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। दो माह के अंतराल में राज्य के अलग-अलग अंचलों में उद्योग-रोजगार दिवस का आयोजन किया जाए। पॉवरलूम सहित अन्य परम्परागत उत्पादन गतिविधियों को निरंतरता प्रदान करना आवश्यक है। इसी लिये विशेषज्ञों का सहयोग लेकर कौशल उन्नयन तथा तकनीकी दक्षता में सुधार के लिए क्षेत्रीय स्तर पर कैम्प आयोजित किये जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। अपनी पहल और नवाचार से सफलतापूर्वक गतिविधियां संचालित करने वाले उद्यमियों को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इससे अन्य लोग भी प्रेरित होंगे।

बैठक में जानकारी दी गई कि 55 हजार करोड़ रूपए के निवेश से प्रदेश में 17 लाख 55 हजार पंजीकृत एमएसएमई इकाईयां संचालित हैं। इससे 92 लाख से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। प्रदेश में 5 हजार 300 स्टार्ट-अप संचालित हैं, जिसमें से 2500 से अधिक महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। अनुपूरक बजट के माध्यम से प्राप्त 1475 करोड़ रूपए की राशि से एमएसएमई इकाईयों के मार्च 2025 तक के लंबित अनुदानों का निराकरण किया जा चुका है। ग्वालियर व्यापार मेला-2025 में 3 हजार 327 करोड़ रूपए का व्यापार हुआ। निवेशकों को लैण्ड बैंक से अवगत कराने के लिए विभागीय वेबसाइट के माध्यम से जानकारी दी जा रही है, लगभग 1100 से अधिक प्लॉट एक मई से आवंटन के लिए उपलब्ध होंगे। निवेशकों को शासन की नीतियों से अवगत करवाने के लिए जिलेवार कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में विभाग की उपलब्धि लक्ष्य से अधिक रही है। एमएसएमई डे के अवसर पर 27 जून को इंदौर में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पर केन्द्रित भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसी प्रकार सितम्बर माह में भोपाल में स्टार्ट-अप पर केन्द्रित कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना है।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।