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जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा उपचुनाव की तैयारियां की शुरू

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। नेशनल कान्फ्रेंस के साथ अभी तक पार्टी का समझौता नहीं हुआ है। इसके बावजूद कांग्रेस नगरोटा सीट को गठबंधन के तहत अपने खाते में मान रही है। कांग्रेस ने अपनी तरफ से बडगाम की सीट नेशनल कान्फ्रेंस के लिए छोड़ने का मन बनाया है।

दोनों राजनीतिक दलों के बीच समझौता एक-दूसरे के समर्थन में होगा। हालांकि सीटों के बंटवारे का यह प्रारूप कांग्रेस ने ही डिजाइन किया है। इस पर नेशनल कान्फ्रेंस की तरफ से अभी तक किसी भी नेता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा था। पार्टी ने 39 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। लेकिन इनमें से महज छह सीटें कांग्रेस जीत पाई थी।
जम्मू संभाग में कांग्रेस की हालत काफी खराब थी। यहां पार्टी ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा और महज एक ही सीट पर जीत हासिल की। कश्मीर में 10 सीटों पर कांग्रेस ने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। उसमें से पांच सीटों पर जीत मिली थी। इस बार उपचुनाव में एक सीट जम्मू संभाग में खाली है, जबकि दूसरी सीट कश्मीर संभाग में खाली हुई है। कांग्रेस नगरोटा में अपने पुराने प्रदर्शन को देखते हुए भी यहां दमदार प्रत्याशी मैदान में उतारने जा रही है। कांग्रेस ने अपनी तरफ से साफ कर दिया है कि गठबंधन हो या न हो पार्टी नगरोटा सीट पर उपचुनाव में उतरेगी।
राहुल गांधी के दौरे ने बढ़ाया जोश

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बीते दिनों प्रदेश का दौरा किया है। पाकिस्तान की गोलाबारी से प्रभावित इलाकों का मुआयना करने पहुंचे राहुल गांधी से कांग्रेस नेताओं ने भी मुलाकात की थी। इस दौरान पार्टी की आगामी गतिविधियों समेत उपचुनाव की तैयारियों का संदेश राहुल गांधी तक पहुंचाया गया। इसके अलावा बीते दिनों पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की पार्टी के पूर्व विधायक मोहम्मद अमीन भट्ट ने इस्तीफा देकर कांग्रेस ज्वाॅइन कर ली है। कांग्रेस ने पार्टी मुख्यालय में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं और बैठकें लगातार हो रही हैं।

चार राज्यों की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की जा चुकी है। गुजरात की दो विधानसभा सीटों समेत केरल, पंजाब और पश्चिम बंगाल की पांच सीटों पर 19 जून को मतदान और 23 जून को मतगणना होनी है। संभावना जताई जा रही थी कि जम्मू-कश्मीर में भी दोनों विधानसभा सीटों पर उपचुनाव बाकी राज्यों के साथ हो जाएंगे। लेकिन चुनाव आयोग ने फैसला नहीं किया है। राजनीतिक दल प्रदेश में अमरनाथ यात्रा को लेकर चुनाव की तारीख घोषित न होने की बात कर रहे हैं।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने बताया कि पार्टी उपचुनाव की तैयारी कर रही है। कांग्रेस दो में से एक सीट पर चुनाव लड़ेगी। इसमें नेशनल कान्फ्रेंस के साथ समझौता कर बडगाम की सीट छोड़ी जा सकती है। कांग्रेस के पदाधिकारी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि उपचुनाव का फैसला चुनाव आयोग को लेना है। यह फैसला जब भी होगा, कांग्रेस चुनाव लड़ने के लिए तैयार मिलेगी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।