भोपाल की उद्यमी प्रज्ञा औरंगाबादकर ने 2015 में अपनी पहल ‘श्री गृह उद्योग’ की शुरुआत की, जब रिटायरमेंट के बाद आराम करने के बजाय उन्होंने समाजसेवा और आत्मनिर्भरता की राह चुनी। शुरुआत में उन्होंने 5-6 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार दिया और धीरे-धीरे अपना खाद्य उत्पाद आधारित स्टार्टअप खड़ा किया। प्रज्ञा बताती हैं कि मंत्रालय में कार्यरत रहते हुए उनके बनाए व्यंजनों की पहले से ही सराहना होती रही थी, जिससे व्यवसाय की नींव मजबूत रही।
आज वे घर की वर्कशॉप से शुद्ध और घर में पीसे गए मसालों, बेसन और आटे से स्वादिष्ट मिठाइयाँ, नमकीन और उपवास विशेष खाद्य सामग्री बनाती हैं। उनकी वर्कशॉप पूरी तरह से साफ-सुथरी है और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है। भले ही ऑनलाइन वे फिलहाल केवल भोपाल में ही सेवा दे रही हैं, लेकिन उनके बनाए उत्पाद रिश्तेदारों के ज़रिए अमेरिका और यूएई तक पहुँच चुके हैं। व्हाट्सएप और स्थानीय ग्रुप्स के माध्यम से उन्हें नियमित ऑर्डर मिलते हैं।
प्रज्ञा का मानना है कि यह काम उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि आत्मसंतोष का जरिया है। वे कहती हैं, “लोगों को अपने हाथों से बना खाना खिलाकर जो तृप्ति उनके चेहरे पर दिखती है, वही मेरी असली कमाई है।” वे आगे अपने उद्योग को नए प्रयोगों और उत्पादों के साथ विस्तार देना चाहती हैं, लेकिन बिना शुद्धता और स्वाद से समझौता किए। उनका यह सफर प्रेरणादायक है—विशेषकर उन महिलाओं के लिए, जो जीवन के किसी भी मोड़ पर अपने जुनून को रोजगार में बदलने की हिम्मत रखती हैं।





