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कांग्रेस नेताओं के आलोचना करने पर भड़के थरूर

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नई दिल्ली। अपनी ही पार्टी के नेताओं की आलोचनाओं में घिरे कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पलटवार किया है और उन्होंने आलोचना करने वाले नेताओं को अति-उत्साही बता दिया है। शशि थरूर का यह बयान कांग्रेस नेता उदित राज के उस बयान के बाद सामने आया है, जिसमें उदित राज ने शशि थरूर के विदेश में दिए गए एक बयान पर आपत्ति जताई थी और उन्हें भाजपा का सुपर प्रवक्ता बता दिया था। शशि थरूर इन दिनों विदेश दौरों पर गए भारत के सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक का नेतृत्व कर रहे हैं।

शशि थरूर ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पनामा दौरे पर अपने एक भाषण में कहा कि ‘भारत सरकार ने हाल के वर्षों में अपनी सोच में बदलाव किया है। जिसके बाद आतंकियों को भी ये अहसास हो गया है कि उन्हें भारत में हमले की कीमत चुकानी पड़ेगी।’ थरूर ने सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि ‘पहली बार भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक के समय एलओसी पार कर आतंकी ठिकानों पर हमले किए। यहां तक की कारगिल की लड़ाई में भी हमने सीमापार नहीं की थी। इस बार न सिर्फ हमने सीमा पार की है बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा भी पार की है। हमने पाकिस्तान के मध्य में स्थित पंजाब में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।’

थरूर की इस टिप्पणी पर उनकी ही पार्टी के नेता उदित राज ने कहा कि ‘कांग्रेस सांसद शशि थरूर भाजपा के सुपर प्रवक्ता बन गए हैं। जो भाजपा नेता नहीं कह रहे हैं, वो शशि थरूर, पीएम मोदी और सरकार के बारे में कह रहे हैं। क्या उन्हें (थरूर) पता भी है कि पिछली सरकारों ने क्या किया? वे (केंद्र सरकार) भारतीय सशस्त्र बलों का श्रेय ले रहे हैं। शशि थरूर भाजपा के प्रचार विभाग के प्रवक्ता बने हुए हैं।’

उदित राज ने कहा कि ‘आप ये कहकर कांग्रेस के स्वर्णिम इतिहास को कैसे कमतर कर सकते हैं कि पीएम मोदी से पहले भारत ने कभी एलओसी पार नहीं की। 1965 की लड़ाई में भारतीय सेना लाहौर तक पहुंच गई थी। साल 1971 में कांग्रेस के समय पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट दिया गया था। साथ ही यूपीए सरकार के कार्यकाल में कई सर्जिकल स्ट्राइक की गईं, लेकिन उनका ढिंढोरा नहीं पीटा गया। आप पार्टी के प्रति इतने बेईमान कैसे हो सकते हैं, जिस पार्टी ने आपको इतना कुछ दिया।’ कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने भी उदित राज के बयानों को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।

कांग्रेस नेताओं की आलोचना के निशाने पर आए शशि थरूर ने भी पलटवार किया है। उन्होंने पनामा से सोशल मीडिया पर साझा अपनी एक पोस्ट में कहा कि ‘पनामा में एक लंबे और सफल दिन के बाद मुझे मध्यरात्रि में ही कोलंबिया के लिए निकलना है। इसलिए मेरे पास इस सबके के लिए समय नहीं है, लेकिन जो अतिउत्साही लोग उनके बयान की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें बता दूं कि मैं केवल आतंकवादी हमलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के बारे में बात कर रहा था न कि पिछले युद्धों के बारे में। मैंने बताया कि पूर्व में आतंकी हमलों का जवाब देते हुए हमने एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा का ध्यान रखा था, लेकिन हाल के वर्षों में इस सोच में बदलाव आया है। लेकिन हमेशा की तरह ट्रोल्स और मेरे आलोचक मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश करेंगे, लेकिन मेरे पास ज्यादा बेहतर चीजें हैं करने के लिए। शुभरात्रि’

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।