नई दिल्ली। हरियाणा के फरीदाबाद से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहाँ रश्मि अग्रवाल ने अपने शौक को जुनून में बदला और हस्तशिल्प की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘रश्मि क्रिएशंस’ की संस्थापक रश्मि ने न केवल विभिन्न पारंपरिक और आधुनिक कला शैलियों में महारत हासिल की, बल्कि समाज में अन्य महिलाओं और जरूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनाने का भी बीड़ा उठाया है। भोपाल से शुरू हुई यह रचनात्मक यात्रा अब दिल्ली-एनसीआर तक फैल चुकी है, जहाँ उनकी कला और समर्पण की कहानी सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
हरियाणा के फरीदाबाद से ताल्लुक रखने वाली रश्मि अग्रवाल ने अपने शौक को पेशे में बदलते हुए हैंडीक्राफ्ट की दुनिया में एक नई पहचान बनाई है। रश्मि ‘रश्मि क्रिएशंस’ की संस्थापक हैं और उनका कहना है कि उन्हें बचपन से ही कला और हस्तशिल्प का शौक था। हालांकि पढ़ाई और शादी के बाद कुछ समय के लिए ये रुका, लेकिन भोपाल में जन शिक्षण संस्थान से उन्होंने फिर से शुरुआत की। वहीं से 1998 में उनकी पहली एग्ज़िबिशन हुई, जहाँ पहले ही दिन उनके सभी उत्पाद बिक गए। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने इसे पेशेवर रूप में अपनाने का निर्णय लिया।
रश्मि अग्रवाल ने करीब दो दशक से भी अधिक समय में बैटिक, सेरामिक, मधुबनी, तंजौर, बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट, क्रोशिया, कढ़ाई-बुनाई, पेपर मेशे समेत 30 से ज्यादा कला शैलियों में काम किया है। उन्होंने देशभर में कई प्रदर्शनियों में भाग लिया है और दिल्ली-एनसीआर के क्लबों और आयोजनों में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है। साथ ही, वे जरूरतमंदों को मुफ्त में प्रशिक्षण भी देती हैं। उनका उद्देश्य है कि जिनके पास हुनर है लेकिन साधन नहीं, वे भी आत्मनिर्भर बन सकें।
रश्मि बताती हैं कि उनके इस सफर में परिवार का पूरा समर्थन रहा—चाहे वह पति हों या ससुराल के सदस्य। हालांकि शुरुआत में उन्हें आत्मविश्वास की कमी महसूस होती थी, लेकिन परिवार के सहयोग और लोगों के प्रोत्साहन ने उन्हें नई उड़ान दी। आज वे न केवल खुद के लिए एक मुकाम बना चुकी हैं, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं कि अगर कोई काम दिल से किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। उनका संदेश है कि “हर काम को दिल से करें, कभी हार न मानें, तभी आपके काम में आपकी एक अलग पहचान





