db News Network

Home » दिल्ली दौरे पर राहुल गांधी से मुलाकात न होने पर सिद्धारमैया ने दी सफाई

दिल्ली दौरे पर राहुल गांधी से मुलाकात न होने पर सिद्धारमैया ने दी सफाई

0 comments 51 views 2 minutes read

नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को भाजपा नेता अमित मालवीय के उस आरोप को खारिज किया है जिसमें कहा गया था कि राहुल गांधी ने उन्हें मिलने से इनकार कर उनका अपमान किया। मालवीय के इन आरोपों पर सिद्धारमैया ने साफ कहा कि उनका दिल्ली दौरा सिर्फ मैसूरु के दशहरा एयर शो के संबंध में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने के लिए था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिद्धारमैया ने लिखा कि दिल्ली में मेरे दौरे का मुख्य उद्देश्य रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर मैसूरु दशहरा एयर शो पर चर्चा करना था।

सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि राहुल गांधी को कर्नाटक के लोगों से बेहद स्नेह है। वह हमेशा याद करते हैं कि कैसे श्रीमती इंदिरा गांधी और श्रीमती सोनिया गांधी कर्नाटक से चुनी गई थीं और कैसे इस राज्य ने हर मुश्किल घड़ी में कांग्रेस का साथ दिया है। उन्होंने आगे लिखा कि गांधी परिवार कर्नाटक के लोगों के प्यार और समर्थन के लिए हमेशा ऋणी रहेगा और एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे खुद एक गौरवशाली कन्नड़िगा हैं।

राहुल गांधी से मुलाकात ना होने को लेकर अपनी सफाई देते हुए सीएम सिद्धारमैया ने भाजपा पर जमकर निशाना भी साधा। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी कर्नाटक में बदलाव और विकास लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, तब भाजपा ने कन्नड़िगों को उनके हक का केंद्रीय फंड तक नहीं दिया। यहां तक कि जब कर्नाटक में बाढ़ आई, तब प्रधानमंत्री पीएम नरेंद्र मोदी ने एक शब्द भी नहीं कहा।

सिद्धारमैया ने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक से भाजपा सांसदों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के लिए कर्नाटक केवल चुनावों के समय याद आता है, जबकि कांग्रेस के लिए कर्नाटक की भलाई एक रोज का संकल्प है। इसके साथ ही सिद्धारमैया ने यह भी साफ किया कि कांग्रेस हाईकमान के साथ मुख्यमंत्री बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कितनी बार बताऊं? इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई।

गौरतलब है कि भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया था कि राहुल गांधी को सिद्धारमैया से मिलने का समय नहीं मिला और वह बिना मुलाकात किए लौट आए। उन्होंने लिखा कि यह पहली बार नहीं है जब गांधी परिवार ने कर्नाटक के किसी वरिष्ठ नेता का अपमान किया हो। इतिहास गवाह है कि कैसे राजीव गांधी ने बीमार वीरेंद्र पाटिल को पद से हटा दिया था। उन्होंने आगे कहा कि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की प्रतीक्षा में हैं और सिद्धारमैया मजबूरी में उनके पीछे छिप रहे हैं।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।