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कपिल सिब्बल का अमित शाह पर तंज, कही यह बात

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नई दिल्ली। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बारे में कोई पुख्ता सूचना नहीं मिलने पर विपक्षी कांग्रेस समेत तमाम दल केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। ताजा कड़ी में कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए पूछा है कि इतना तो ता दीजिए कि धनखड़ साहब अस्पताल में भर्ती हैं या योग कर रहे हैं। सिब्बल ने इस बारे में सोशल मीडिया पर ‘लापता धनखड़’ शीर्षक दे अमित शाह से सवाल पूछे हैं।

सिब्बल ने लिखा है, “लापता धनखड़… अमित शाह जी: मुझे मालूम है कि आप असत्य से दूर रहते हैं। हमें इतना तो बता दीजिए कि धनखड़ जी क्या: हॉस्पिटल में हैं या फिर योग कर रहे हैं? या फिरटेबल टेनिस खेल रहे हैं?”

एक दिन पहले ही अमित शाह ने जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर खुलकर बात की थी और कहा था कि उन्होंने अपने स्वास्थ्य के चलते उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था और इसमें किसी को कुछ खोजने की जरूरत नहीं है। लगे हाथ शाह ने कहा था कि संवैधानिक पद पर रहते हुए धनखड़ जी ने अच्छा काम किया था।

कछ दिनों पहले ऐसी खबर आई थी कि पिछले महीने उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ अपने परिवार के साथ समय बिताने के साथ ही नियमित रूप से योगाभ्यास कर रहे हैं और टेबल टेनिस खेल रहे हैं। अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने से पहले धनखड़ जब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे, तब उन्होंने शौकिया टेबल टेनिस खेलना शुरू किया था।

धनखड़ की दिनचर्या से वाकिफ लोगों ने बताया कि वह नियमित रूप से योग अभ्यास करते हैं और उपराष्ट्रपति एनक्लेव में अपने शुभचिंतकों व स्टाफ सदस्यों के साथ टेबल टेनिस खेलते हैं। पूर्व उपराष्ट्रपति की दिनचर्या से अवगत एक व्यक्ति ने बताया, “यहां तक ​​कि यात्रा से लौटने के बाद भी वह अपने स्टाफ सदस्यों के साथ टेबल टेनिस खेलते थे।”

धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 को समाप्त होना था। अब उनके उत्तराधिकारी को चुनने के लिए नौ सितंबर को चुनाव होने हैं। केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को उनके खिलाफ मैदान में उतारा है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।