नई दिल्ली। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार को दावा किया कि बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे उत्तर कोरिया, रूस और चीन के चुनावों जैसे हैं, जहां सारे वोट एक ही पार्टी को जाते हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले राजग ने बिहार चुनाव में कांग्रेस, राजद और अन्य दलों के ‘महागठबंधन’ को करारी शिकस्त दी और 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 से ज़्यादा सीट जीतीं। कांग्रेस को सिर्फ छह सीट मिलीं।
राज्यसभा सदस्य सिंह ने मध्यप्रदेश के गुना जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर आवन गांव में संवाददाताओं से कहा, जो नतीजे आए हैं, वे उत्तर कोरिया, चीन और रूस के चुनावों जैसे हैं, जहां सभी वोट एक ही पार्टी को जाते हैं।उन्होंने कहा, बासठ लाख नाम हटाए गए और 20 लाख नाम जोड़े गए। निर्वाचन आयोग (ईसी) ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किसके नाम हटाए गए और किसके जोड़े गए। सिंह ने कहा कि यह जानना हर किसी का अधिकार है कि उसने जो वोट डाला, वह उसके इच्छित उम्मीदवार को गया या नहीं।
उन्होंने कहा, मेरे वोट की गिनती होनी चाहिए। मुझे एक रसीद मिलनी चाहिए जिससे पता चले कि मेरा वोट कहां गया। दुनिया में जहां भी ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) का इस्तेमाल होता है, वहां बटन दबाने के बाद एक रसीद दी जाती है। यह निर्वाचन आयोग की ज़िम्मेदारी है कि लोगों का ईवीएम पर भरोसा हो। यह पूछे जाने पर कि क्या महिला उद्यमियों को 10,000 रुपये देने वाली ‘मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना’ बिहार चुनावों में एक मुद्दा बनी, कांग्रेस नेता ने कहा, यह पैसा किसका है? यह जनता का पैसा है। आप एक हाथ से जनता से पैसा लेते हैं और दूसरे हाथ से उसे वापस कर देते हैं।
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, सिंह ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की ज़िम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। उन्होंने निर्वाचन आयोग के सिलसिले में कहा, उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फ़ॉर्म भरा जाए। अब वे कह रहे हैं कि आप फ़ॉर्म भरें, अपने पिता का जन्म प्रमाण पत्र लाएं, अपने दादा का जन्म प्रमाण पत्र लाएं। जिसने मैट्रिक पास नहीं किया है, वह मैट्रिक का प्रमाण पत्र कहां से लाएगा। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर प्रक्रिया को जटिल बनाने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, आपका पासपोर्ट आधार से बनता है और आप आधार से बैंक खाता खोल सकते हैं। फिर यहां आधार का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है? उच्चतम न्यायालय पहले ही ऐसा कह चुका है। उन्होंने 11 दस्तावेज़ों की सूची दी है, लेकिन आधार को शामिल नहीं किया है।





