मध्य प्रदेश के इंदौर से स्पोर्ट्समैन और मॉडल परीक्षित सोनी ने संघर्ष और जुनून के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। बचपन में कमजोर कद-काठी के कारण उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी माँ ने उन्हें हार मानने के बजाय अखाड़े की राह दिखाई। वहीं से उनकी खेल और फिटनेस की यात्रा शुरू हुई, जिसने आगे चलकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया।
परीक्षित सोनी बताते हैं कि बचपन में एक घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। मोहल्ले के बड़े बच्चों से झगड़े के बाद उनकी माँ ने उन्हें अखाड़े में भेजा, जहां से उन्होंने व्यायाम और खेल की दुनिया में कदम रखा। अखाड़े में लगे महान बॉडीबिल्डर्स और खिलाड़ियों के पोस्टर देखकर उनके भीतर भी मजबूत बनने की प्रेरणा जगी। इसके बाद उन्होंने वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग शुरू की और धीरे-धीरे जिला व राज्य स्तर पर पदक जीतने लगे।
साल 2019 में उनका चयन “स्पोर्ट्स इंडिया” कार्यक्रम के लिए हुआ, जहां खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, डाइट और पढ़ाई का खर्च सरकार उठाती है। लेकिन इसी दौरान एक गंभीर सड़क दुर्घटना में उनकी दाईं टांग छह जगह से टूट गई। डॉक्टरों ने कहा कि सामान्य रूप से चलने में भी डेढ़ से दो साल लग सकते हैं। परिवार के सहयोग और मजबूत इरादों के बल पर उन्होंने केवल छह महीनों में वॉकर छोड़ दिया और एक साल के भीतर फिर से खेल में वापसी कर ली। वापसी के बाद उन्होंने राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीता और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया।
खेल के साथ-साथ परीक्षित को बचपन से ही मॉडलिंग का भी शौक था। कॉलेज के पर्सनैलिटी डेवलपमेंट प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर उन्होंने मॉडलिंग की शुरुआत की और बाद में कुछ फैशन शो में रैंप वॉक भी की। उनका कहना है कि खेल और मॉडलिंग दोनों ही क्षेत्रों में अनुशासन और मेहनत जरूरी है। भविष्य को लेकर उनका सपना है कि वे ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करें और साथ ही देश के बड़े सुपरमॉडल के रूप में भी अपनी पहचान बनाएं।





