मध्यप्रदेश मे इस समय बसों के संचालन में नेतागिरी हावी है, और यही कारण है की बस संचालक अपनी मर्जी से परिवहन विभाग के सारे नियमों को ताक पर रख बसों का संचालन कर रहे हैं,जिसके चलते कई बार बस हादसे देखने को मिलते हैं, बावजूद परिवहन विभाग इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं पाता,और य़ह बस संचालक अपनी मन मानी के चलते अपना मुनाफा कमाने के लिए न ही समय पर कभी बस फिटनेस, परमिट, बीमा कराते हैं, बात अगर ग्वालियर जिले की जाए तो आधे से अधिक बसों की हालत कंडम है,इनमे ज्यादातर बस संचालक या तो बीजेपी और कॉंग्रेस पार्टी में अपना बाजूद रखते हैं। वही कुछ बस संचालकों ने भी इस बात को माना है, जो बस संचालक बड़े बड़े नेताओं या अधिकारियों संपर्क में हैं उन पर परिवहन विभाग भी कार्यवाही करने से कतराता है और यही कारण है कि वह लोग परिवहन विभाग को ठेंगा दिखाते हुए सारे नियमों के धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं। और कोई ना कोई बड़ा बस हादसा हो जाता है जिसमें सैकड़ो लोगों की जान चली जाती है, और परिवहन विभाग भी दिखावे के लिए सिर्फ उन बस संचालकों पर कुछ समय के लिए कार्यवाही करती हैं जिनका कोई रासुक है न ही कोई नेता से संपर्क।
वही मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त नरोत्तम भार्गव का कहना कि चाहे राजा हो या रंग सभी के लिए कार्यवाही एक समान होती है.. वाहनों के परमिट तीन तरह के दिए जाते हैं..पहला परमिट होता है जिले से जिले के लिए.. दूसरा परमिट होता है एक संभाग से दूसरे के संभाग के लिए और तीसरा परमिट होता है नेशनल परमिट विभाग सभी दस्तावेज चेक करने के बाद ही परमिट देता है यदि कहीं परमिट दूसरे रूट का है और बस कहीं चल रही हैं तो यह गंभीर है और समय-समय पर फिटनेस और बीमा को प्रवीण विभाग के द्वारा चेक किया जा रहा है आगे भी विभाग के द्वारा कठोर कार्रवाई देखने को मिलेगी





