नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने जा रहे हैं। वह राज्य के सभी कांग्रेस विधायक और सांसद के साथ अंतरण और सहायता अनुदान के संबंध में केंद्र के कथित अन्याय के खिलाफ सात फरवरी को नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके लिए सीएम ने दिल्ली चलो आंदोलन का एलान किया है। यह प्रदर्शन बुधवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर होना है।
15वें वित्त आयोग से कर्नाटक के साथ हुए कथित अन्याय और केंद्र से अनुदान समेत राज्य से जुड़े कई अन्य मुद्दों को लेकर सिद्धारमैया केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक को न्याय और अनुदान में भेदभाव नहीं सहना चाहिए। इसके लिए उन्होंने भाजपा सांसदों से भी इसमें भाग लेने का अनुरोध किया।
वहीं, सीएम ने निर्मला सीतारमण, राजीव चंद्रशेखर, एचडी देवगौड़ा, तेजस्वी सूर्या और मल्लिकार्जुन खरगे सहित सांसदों को पत्र लिखकर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं है, यह करुनाडु और कन्नडिगा के फायदे के लिए है। यह संघर्ष कर्नाटक के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ है। इसलिए हम सभी से अनुरोध करते हैं कि चाहें किसी भी पार्टी से जुड़े हों आंदोलन में जरूर भाग लें। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान भी राज्य को उचित सहायता नहीं मिली और अनुदान में भेदभाव हो रहा है।
राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आज विधान सौदा में इस मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद कहा कि यह विरोध भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ नहीं है। इसलिए सभी विधायकों को भाग लेना चाहिए।
उन्होंने कहा सरकार इसका विरोध करेगी, सभी विधायकों को पार्टी भूल जाना चाहिए और भाग लेना चाहिए। हम सभी को राज्य की भलाई के लिए मिलकर लड़ना होगा। हम एक संघ प्रणाली में हैं। हम केंद्र सरकार को सहयोग दे रहे हैं, लेकिन केंद्र द्वारा हमारे साथ अनुचित व्यवहार जारी है। हमें कोविड के दौरान भी उचित राहत नहीं मिली, भारी बारिश के दौरान भी हमें अनुदान नहीं मिला। भद्रा मेलदांडे परियोजना के लिए 5300 करोड़ रुपये नहीं दिए गए। यह भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन नहीं है। इसके बजाय, यह वित्तीय वितरण और सूखा राहत में भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ एक विरोध है।





