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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बोले- भगवान शिव के आशीर्वाद से काशी में बज रहा विकास का डमरू

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वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र के दूसरे दिन सुबह बीएचयू के स्वतंत्रता भवन पहुंचे और काशी ज्ञान, फोटोग्राफी व संस्कृति प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत कर उपस्थित लोगों को संबोधित किया। पीएम ने काशी से विकास को लेकर सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया।जमीन पर योजनाओं के उतरने और उसका लाभ आमजन तक पहुंचने की बात कही। इसके साथ ही पीएम ने मोदी की गारंटी पूरी का अर्थ गारंटी पूरी होने की गारंटी की बात कहकर विकास को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं को दोहराया। बीएचयू के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी सीरगोवर्धनपुर स्थित संत रविदास मंदिर गए और संत को नमन कर उनकी प्रतिमा का लोकार्पण कर सभा को संबोधित किया।

इसके पूर्व पीएम ने बीएचयू में कहा कि भगवान शिव के आशीर्वाद से काशी में चारों ओर विकास का डमरू बजा है। काशी में सब कुछ करने वाले महादेव और उनके गण हैं। महादेव के आशीष से काशी में चारों ओर विकास हुआ। काशी सर्वविद्या की राजधानी है, आप काशी की ज्ञान प्रतियोगिता में शामिल हुए यह बड़े गर्व की बात है। बाबा धाम के लोकार्पण के मौके पर दिए अपने वक्तव्य को दोहराया और काशी की आध्यात्मिक महत्ता के साथ विविधता पर भी प्रकाश डाला।

काशी जैसे तीर्थ और विश्वनाथ धाम जैसे मंदिरों को भारत की श्रेष्ठता की पहचान बताई तो राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद निखर रही अयोध्या नगरी के वैभव को भी मंच से सराहा। विकास कार्यों पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि देश सफलताओं के नए प्रतिमान गढ़ेगा यह मोदी की गारंटी है। आप भी जानते हैं कि मोदी की गारंटी मतलब गारंटी पूरी होने की गारंटी है। पीएम नरेन्द्र मोदी बीएचयू के बाद सीरगोवर्धनपुर पहुंचे और गुरुचरणों की वंदना कर लंगर भी छका। इस दौरान उन्होंने संत रविदास की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया और सभा को संबोधित किया। संत रविदास के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला और उनके आदर्शों की पुन: स्थापना के संकल्पों को भी मंच से दोहराया।

सीर गोवर्धनपुर के आयोजन में शामिल होने के बाद पीएम करखियांव में बनास डेयरी सहित कई अन्य परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रम में शामिल हुए। पीएम करखियांव स्थित एग्रो पार्क पहुंचे और काशी बनास संकुल (अमूल प्लांट) का निरीक्षण करने के बाद करखियांव एग्रो पार्क परिसर से 13202.07 करोड़ रुपये की 36 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। लोकार्पण व शिलान्यास के बाद उन्होंने जनसभा को भी संबोधित किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने वाराणसी प्रवास के दौरान बरेका गेस्ट हाउस में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल अध्यक्षों और पदाधिकारियों सहित दर्जन भर से अधिक लोगों से मुलाकात की। इस दौरान सभी से चुनाव को लेकर फीडबैक लिया और आगामी चुनाव में जनता से जुड़ने के साथ जीत का मंत्र दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी लोगों को पिछली बार के मतों से 370 मत अधिक मतों की अपनी अपेक्षा जताई। इसके लिए अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत पर जोर दिया। कहा कि जब जरूरत होगी मैं आप लोगों की सेवा में हाजिर रहूंगा।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।