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पीएम के बंगाल दौरे से पहले हो सकता है सीट शेयरिंग का एलान

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी के बीच में सीटों के तालमेल को लेकर प्रयास तेज हो गए हैं। कांग्रेस के एक संकट मोचक ने भी इनिशिएटिव ले लिया है। सूत्र बताते हैं कि सब ठीक रहा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेशखाली दौरे से पहले तृणमूल कांग्रेस सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप दे सकता है। प्रधानमंत्री 1-2 मार्च को पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं और वह संदेशखाली भी जाएंगे।

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ने भी कहा कि अभी गठबंधन की संभावना खत्म नहीं हुई है। सूत्र का कहना है कि राजनीति में कुछ बंद नहीं होता। वैसे भी ममता बनर्जी I.N.D.I गठबंधन को मजबूती देने वाले नेताओं में हैं। पश्चिम बंगाल के कांग्रेस की पूर्व सांसद दीपादास मुंशी इस समय तेलंगाना और केरल के दौरे पर हैं। दीपादास मुंशी कहती हैं कि अभी इसके बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है। वह केवल पहले की स्थिति जानती हैं। इसमें तृणमूल कांग्रेस पार्टी को केवल दो सीट दे रही थी। बदले में दूसरे राज्य में तृणमूल सीटें मांग रही थी। कोई नई बात हो रही हो तो नहीं कह सकते। इतना जरूर है कि 2024 में एनडीए को सत्ता से हटाने के लिए सभी धर्म निरपेक्ष दलों को अपने निजी हितों से ऊपर उठकर एक मंच पर आना चाहिए।

भाजपा की नेता अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि संदेशखाली में महिलाओं से बलात्कार हुआ है। इससे बुरा कुछ और हो सकता है क्या? लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौन हैं? भाजपा पश्चिम बंगाल में बहुत आक्रामक है। सुवेंदु अधिकारी ने भी पश्चिम बंगाल की सरकार पर इसे लेकर काफी आक्रामक रुख अपनाया है। तृणमूल के सांसद भी मानते हैं कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले संदेशखाली की घटना ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छवि को चोट पहुंचाई है। कांग्रेस के सांसद भी संदेशखाली प्रकरण को राज्य की तृणमूल सरकार के लिए अच्छा नहीं बता रहे हैं। कांग्रेस के लोकसभा में नेता अधीररंजन चौधरी तो बाकायदा संदेशखाली जाने के लिए निकल पड़े थे। जब अधीर को पुलिस ने रोका तो वहीं धरने पर बैठ गए थे। अधीर रंजन चौधरी और ममता बनर्जी में 36 का आंकड़ा रहता है। अधीर से नाराजगी को लेकर ममता बनर्जी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की 40 सीटों से भी नीचे आने की भविष्यवाणी कर दी थी।

संदेशखाली प्रकरण के बाद माना जा रहा है कि इंडिया गठबंधन को पश्चिम बंगाल में जल्द मजबूती मिल सकती है। संदेशखाली प्रकरण के बाद तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी काफी तिलमिलाई हैं। वह इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के लिए भाजपा को करारा जवाब देना चाहती हैं। ऐसे में कांग्रेस से सीटों के तालमेल को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। राष्ट्रीय जनता दल और समाजवादी पार्टी के नेता भी चाहते हैं कि अब धर्म निरपेक्ष दल तेजी से तालमेल को अंतिम रूप दें, क्योंकि लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने में तीन सप्ताह से भी कम समय रह गया है।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है कि पश्चिम बंगाल से कांग्रेस 02 सीटों से अधिक जीतने की स्थिति में नहीं है। भाजपा के बारे में सूत्र का कहना है कि इस बार 2019 नहीं दोहराया जाएगा। भाजपा के खाते में अधिकतम 03 या चार सीट आएंगी। जबकि तृणमूल कांग्रेस 35 से 36 सीटों को जीतने की क्षमता रखती है। लेकिन सूत्र का कहना है कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच में गठबंधन के बाद भाजपा को बमुश्किल 01 सीट ही मिल पाएगी। इसलिए हम तो इंडिया गठबंधन के पक्ष में हैं। धर्म निरपेक्ष दलों को साथ आना चाहिए। बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु की तरह पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस को जिम्मेदारी के साथ आगे आना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव को भी काफी उम्मीदें हैं

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।