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कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक आज, लोकसभा सीटों के लिए तय हो सकते हैं उम्मीदवार

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की पहली बैठक आज होगी। इसमें 130 से 150 सीटों पर विचार होगा। ये वो सीटें हैं, जिन पर राज्यों में कोई चुनावी गठबंधन नहीं है। उत्तराखंड, तेलंगाना, कर्नाटक, झारखंड जैसे राज्यों के अलावा इनमें ज्यादातर दक्षिण भारत के राज्य हैं, जहां पार्टी का किसी से कोई गठबंधन नहीं है। दिल्ली में होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, अजय माकन समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। यह जानकारी पार्टी के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर राज्यों में उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग लगभग तय हो चुकी है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी आगामी लोकसभा चुनाव में अमेठी और वायनाड से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत कर सकती हैं। इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पार्टी ने इस पर काम शुरू कर दिया है। रायबरेली में प्रियंका के समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लिखा है- रायबरेली की पुकार, प्रियंका अबकी बार। अमेठी को लेकर भी लगातार बैठकों का दौर जारी है, जिसमें स्थानीय नेताओं के साथ केंद्रीय नेता भी यहां की चुनावी जमीन का आकलन कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों रायबरेली से सांसद सोनिया गांधी ने राजस्थान से राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद भावुक चिट्ठी लिखकर यहां के लोगों से परिवार के लिए उनका साथ मांगा था।

देश के युवाओं को लुभाने की कोशिश में कांग्रेस पहली बार उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव जीतने पर ‘रोजगार का अधिकार’ प्रदान करेगी। कांग्रेस की घोषणापत्र समिति ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से उनके आवास पर मिलकर घोषणापत्र के मसौदे की प्रति सौंपी। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता वाली समिति में शशि थरूर, के राजू, गुरदीप सप्पल और इमरान प्रतापगढ़ी सदस्य हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस घोषणापत्र में देश में पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानून और सजा का प्रस्ताव भी रखेगी और सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता लाने के उपाय भी सुझाएगी। कांग्रेस कार्य समिति की मंजूरी के बाद घोषणापत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा।

पांच-न्याय’ (न्याय के पांच स्तंभ) पर है जिसका वादा कांग्रेस ने राहुल गांधी की अगुवाई वाली ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान किया था। घोषणापत्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और सरकारी रिक्तियों को भरने के लिए देश में जाति आधारित जनगणना पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसमें समाज के हाशिए पर मौजूद वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करने जैसे कुछ कल्याणकारी उपायों पर भी जोर दिए जाने की संभावना है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें न्याय मिले और वे सरकार की कल्याणकारी कदमों का हिस्सा बनें।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।