db News Network

Home » गर्मी बढ़ने पर हम धूप और पसीने के संपर्क में आते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है… कीटोजेनिक डाइट से रहें स्वस्थ और चुस्त – दिशा

गर्मी बढ़ने पर हम धूप और पसीने के संपर्क में आते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है… कीटोजेनिक डाइट से रहें स्वस्थ और चुस्त – दिशा

0 comments 1.1K views 1 minutes read

ग्वालियर, मध्यप्रदेश। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कीटोजेनिक डाइट आपके शरीर के लिए बहुत कारगर है। कई अध्ययनों से पता चला है कि इस प्रकार का आहार आपको वजन कम करने, आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और आपकी ऊर्जा को बढ़ाने में मदद कर सकता है। यह कहना है मध्यप्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली कीटोजेनिक थेरेपिस्ट दिशा संतवानी का।

दिशा के अनुसार गर्मियों के दिनों में धूप और पसीने के संपर्क में आने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप थकान, कमजोरी और बेचैनी जैसे लक्षण हो सकते हैं। गर्मियों के दौरान अक्सर अनिद्रा और भूख कम लगने जैसी समस्याएं भी महसूस होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में सही आहार का सेवन करने से आपको इन लक्षणों से बचने में मदद मिल सकती है।

स्वस्थ नाश्ता करने से आपको पूरे दिन स्वस्थ और ऊर्जावान रहने में मदद मिल सकती है। आप अपने नाश्ते में अंकुरित मूंग, फल, मेवे और बीज जैसे स्नैक्स शामिल कर सकते हैं। इन चीजों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन और मिनरल्स होते हैं। चूंकि गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है, इसलिए नींबू पानी, जौ का पानी और नारियल पानी जैसे स्वस्थ विकल्प आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं।

दिशा के अनुसार, गर्मी के मौसम में कुछ चीजों का सेवन आपको थकान, डिहाइड्रेशन, माइग्रेन और सुस्ती से निपटने में मदद कर सकता है। अपने नाश्ते में अंडे और दूध को शामिल करें। अंडे आपको पूरे दिन ऊर्जावान बनाए रख सकते हैं। अंडे अमीनो एसिड और अच्छे वसा से भरपूर होते हैं। वहीं दूध में कैल्शियम और प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। अंडे और दूध मिलकर प्रोटीन, सोडियम, फोलेट, सेलेनियम और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। यह उच्च-प्रोटीन संयोजन निर्जलीकरण को रोकते हुए मांसपेशियों के विकास को बढ़ावा देता है।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।