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प्रियंका बोलीं- PM मोदी खोखले संसार में रह रहे हैं

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नई दिल्ली। राजस्थान में पार्टी के घोषणा पत्र को लॉन्च करने के लिए जयपुर में कांग्रेस की बड़ी सभा हो रही है। इसमें शामिल होने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई बड़े नेता जयपुर आए हैं। सभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने भाजपा और मोदी सरकार पर तीखे प्रहार किए। प्रियंका गांधी ने कहा- कांग्रेस का घोषणा पत्र एक सूची नहीं है, यह संघर्ष की आवाज है। आज देश की परिस्थितियां क्या है आप सब अच्छी तरह जानते हैं। 45 सालों में इतनी बेरोजगारी नहीं रही जितनी आज है। बड़े-बड़े वादे किए थे बीजेपी ने लेकिन एक भी पूरा नहीं किया। ये अग्नीवीर जैसी योजना लाए- जिससे बच्चों की आशाएं टूट गईं। देश में हर जगह पेपर लीक हो रहे हैं। महंगाई की यह परिस्थति है कि चुनाव आने लगा तो दो महीने पहले गैस सिलेंडर सस्ता कर दिया। लेकिन इतने सालों से इन्होंने क्या किया?

प्रियंका गांधी ने कहा- किसानों की क्या परिस्थिति है। किसान सड़क पर आंदोलन करता है, पीएम उनकी सुनवाई नहीं करते। पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। कमाई में रुकावट और महंगाई, बेरोजगारी बढती जा रही है। इनके बारे में मीडिया आपको कुछ नहीं बताता है। भाजपा के राजस्थान में आते ही चिरंजीवी स्कीम बंद हो गई। क्या इसके बारे में आपको जानकारी मिलती है। गरीब के लिए आगे का कोई रास्ता नहीं है। पूंजीपतियों के हजारों करोड़ के लोन माफ हो जाते हैं, लेकिन किसान 10 हजार के लोन के लिए आतमहत्या कर लेता है। असलियत क्या है इसको पहचानने का अब समय आ गया है। आपको सिर्फ यह सुनाई देता है कि 400 पार, सिर्फ यह दिख रहा है कि मोदीजी कहां भ्रमण कर रहे हैं। जितनी भी बड़ी स्कीमें बनी हैं वह सब उद्योगपतियों के लिए बनी है। जब हम न्याय की बात करते हैं तो हम यह पहचान कर कह रहे हैं कि आपके जीवन में अन्याय हो रहा है। कमजोर, मजदूर और गरीब की कोई सुनवाई नहीं है।

प्रियंका गांधी ने कहा कि पीएम मोदी एक खोखले संसार में रह रहे हैं। बड़ी-बड़ी इवेंटबाजी दिखाई जाती है सिर्फ सच्चाई छुपाने के लिए। आज पूरे विपक्ष पर हमला हो रहा है। दो-दो मुख्यमंत्री जेल में हैं। कहते हैं भ्रष्टाचार पर हमला हो रहा है और भ्रष्टारियों को अपनी पार्टियों में ले रहे हैं। आज जो आप वोट डालने जा रहे हैं, वह देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए जा रहा है।

प्रियंका गांधी ने कहा- आज यह नौबत आ गई है कि जनता को ईवीएम पर भी भरोसा नहीं रह गया है। इन सब परिस्थतियों के बीच हमारा जो न्याय पत्र है उसे हम पूरा करके दिखाएंगे। इसका प्रमाण यह है कि हमने राजस्थान में भी अपना घोषणा पत्र पूरा करके दिखाया। स्थाई कृषि आयोग ऋण बनेगा। फसलों का नुकसान होने पर 30 दिन में पैसा बैंक खाते में जमा होगा। कृषि में जितने भी उपकरण इस्तेमाल होते हैं उन्हें जीएसटी से मुक्त किया जाएगा। हर परिवार में पहली नौकरी पक्की और स्नातक पास को पक्की नौकरी मिलेगी। पेपर लीक के लिए नया कानून बनाया जाएगा, जो ऐसे काम करवाएंगे उन पर सख्ती करेंगे। भर्ती के लिए कलेंडर बनाया जाएगा। गिग वर्कस को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। युवाओं को नौकरी मिले इसके लिए 5 हजार करोड़ का फंड बनेगा। महिलाओं को सालाना एक लाख रुपए सरकार से मिलेगा। केंद्र में जो नई भर्तियां हैं उनमें से 50 प्रतिशत महिलाओं को दी जाएंगी। आशा-आंगबाड़ी वर्कस के लिए केंद्र का योगदान दोगुना होगा। दिवासियों के लिए वन अधिकार अधिनियम लागू किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन किए थे, उन्हें वापस लिया जाएगा। जहां आदिवासियों की आबादी ज्यादा है, उसे अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया जाएगा। श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य की गारंटी दी जाएगी। शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार गारंटी का कानून लागू होगा।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।