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PDM की जनसभा में बोले AIMIM प्रमुख ओवैसी

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नई दिल्ली। मुख्तार अंसारी न्यायिक अभिरक्षा में मार दिए गए। वह शहीद हैं और ऐसे लोग कभी मरा नहीं करते, वो जिंदा रहते हैं। उन्हें बचाने की जिम्मेदारी बीजेपी सरकार की थी, मगर वह नाकाम रही। जो जुल्म करेगा, उससे कुदरत नाराज होती है। यह बातें एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रात बुनकर कॉलोनी के मैदान, नाटीइमली में पीडीएम न्याय मोर्चा की जनसभा में कहीं।असदुद्दीन ओवैसी ने 40 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। कहा कि हम पर आरोप लगाया जाता है कि हम बीजेपी के बी पार्टी हैं।

यदि हम बी पार्टी हैं तो अखिलेश यादव 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव और 2017 व 2022 का विधानसभा चुनाव भाजपा से क्यों हार गए? क्या उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या योगी आदित्यनाथ से कोई डील कर रखी है? ओवैसी ने कहा कि अखिलेश यादव का आधा परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठकर चाय पीता है और वह हमसे कहते हैं कि जान दे दो।

पूर्व सांसद को हथकड़ी में गोली मारी जाती है। उनका एमएलए जेल चला जाता है। मदरसों के बंद कराने की बात आती है, मगर अखिलेश यादव की जुबान से एक शब्द नहीं निकलता। वह बस इतना ही चाहते हैं कि भैया के लिए जान दो, पीछे चलो और दरी बिछाओ।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान पहुंचे। वहां उनकी जुबान अपनी ओरिजिनल जुबान पर आ गई। उन्होंने बताया कि 17 करोड़ मुसलमान घुसपैठी हैं और वह ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं। मोदी की एक ही गारंटी है मुसलमानों से नफरत…।

दूसरी गारंटी है संविधान बदलना…। तीसरी गारंटी है गरीब और पिछड़ों के आरक्षण को खत्म करना। उन्होंने कहा कि देश की पांच फीसदी जनता के पास देश की 60 फीसदी दौलत है। भाजपा को जिसने इलेक्टोरल बॉन्ड दिया, उसे ठेके मिले। ओवैसी ने कहा कि 13 मई के बाद हम फिर आएंगे और जो गरीबों का खून पीते हैं उन जालिमों के खिलाफ जनता को फिर से आगाह करेंगे।

ओवैसी ने कहा कि पिछड़ों और मुसलमानों के बारे में कुछ पूछने पर अखिलेश यादव कुछ बोल नहीं पाते हैं। मुरादाबाद से उन्होंने एचटी हसन को टिकट सिर्फ इसलिए नहीं दिया ताकि वह दोबारा जीत कर मजबूत न हो जाएं। सपा या कांग्रेस ने कभी हम लोगों के साथ न्याय नहीं किया। हमने तीन तलाक और सीएए का खुलकर विरोध किया। हम यूपी की राजनीति के एक बड़े तबके के लिए एक विकल्प लेकर आए हैं। सपा और भाजपा से छुटकारा पाना है तो पीडीएम न्याय मोर्चा को मजबूत करना होगा।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।