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मध्यप्रदेश में दो चरणों के लोकसभा चुनाव के बाद अब 7 मई को तीसरे चरण का मतदान…ग्वालियर में सियासी पारा चढ़ा, कांग्रेस-भाजपा के अपने अपने दावे।

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भोपाल। मध्यप्रदेश में दो चरणों का लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुका है। अब 7 मई को तीसरे चरण के मतदान की तैयारियां जोरो शोरों पर हैं। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने में जुटे हुए हैं। बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कमल माखीजानी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा तो वहीं कांग्रेस नेता कमल कुशवाहा ने भी बीजेपी को आड़े हाथों लिया है। आपको बता दें कि यह दोनों नेता ग्वालियर से आते हैं। और ग्वालियर में 7 मई को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की जनता के तराजू में किस पार्टी का पलड़ा भारी रहता है। यहां से भाजपा ने पूर्व मंत्री भारत सिंह कुशवाह को तो कांग्रेस ने पूर्व विधायक प्रवीण पाठक को मैदान में उतारा है।

मोदी जी की गारंटी लोगों को पसंद आ रहीं।

बीजेपी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कमल माखीजानी ने कहा कि मैं लगातार प्रवास पर भी हूं। चाहे ग्रामीण अंचल हो या शहर, हर जगह मोदी जी की गारंटी की बात हो रही है। हमारी जो जनहितेशी योजनाएं हैं। उनको जनता द्वारा पसंद किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ना तो भगवान राम को मानती है, ना सनातन धर्म को मानती है, ना अपने नेता और कार्यकर्ता को मानती है। इसलिए एक-एक करके सारे नेता इनका साथ छोड़कर जा रहे हैं। उन्होंने रामनिवास रावत का जिक्र करते हुए कहा की वह छह बार के एमएलए हैं। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रहे, वह इनका साथ छोड़कर क्यों भारतीय जनता पार्टी में आए हैं। जब आपकी गारंटी आपके नेता और कार्यकर्ताओं को नहीं भा रही है, तो जनता आप पर कैसे विश्वास करेगी।

कमल माखीजानी ने कहा की हमारा संगठन बूथ स्तर तक बहुत अच्छा काम कर रहा है, हम घर-घर जाकर लोगों को मोदी जी की गारंटी के बारे में बता रहे हैं। जो 70 वर्ष के ऊपर के नागरिक हैं, इलाज से वंचित थे। उनके लिए मोदी जी ने आयुष्मान भारत योजना लाई है। जिसमें 5 लाख के साथ निशुल्क स्वास्थ्य की गारंटी मोदी जी ने दी थी। उसको हम धरातल पर ला रहे हैं। और घर-घर जाकर उनका पंजीकरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा की भारतीय जनता पार्टी अपने सक्रिय कार्यकर्ता जो विकास की सोच रखता है। उसके साथ हमारा पूरा संगठन लड़ता है। हमारा कमल का फूल लड़ता है। यहां हमारे लिये कांग्रेस कोई चुनौती है ही नहीं।

माहौल बदलाव का, जनता कांग्रेस के साथ।

वहीं ग्वालियर कांग्रेस के संगठन सचिव कमल कुशवाह ने कहा इस बार माहौल बदलाव का है। कांग्रेस के कार्यकर्ता जो विजन लेकर चले हैं। उस विजन पर ऐसा लगता है कि खरे उतरेंगे। जहां तक भाजपाइयों की बात करें तो वह सिर्फ झूठ परोसते हैं। पर लोगों को अब सब समझ में आ रहा है कि किस तरह से वह झूठा प्रेजेंटेशन दिखाते हैं। उन्होंने लगातार छोड़ रहे कांग्रेस के नेताओं के लिए कहा कि जो स्ट्रांग कार्य कर रहा है वह आज भी पार्टी के साथ खड़े हुए हैं। जो थोड़े से कमजोर होंगे, डरते होंगे वह कार्यकर्ता ही इस्तीफा देते हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार विवेक नारायण शेजवालकर जब सांसद बने उनके कार्यकाल को देखते हुए तो पब्लिक के अंदर गुस्सा नजर आता है। इसलिए भाजपा को इस बार कैंडिडेट बदलना पड़ा। भाजपा इस बार भारत सिंह कुशवाहा को लेकर आई है। लेकिन भारत सिंह कुशवाहा पहले विधानसभा चुनाव लड़े लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

कमल कुशवाह ने कहा कांग्रेस का सबसे बड़ा मुद्दा शहर की बदहाल सड़के बताई। इसके साथ महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि इस बार चुनाव में जनता पूरे बदलाव के मूड में है और कांग्रेस के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में पांच न्याय और 25 गारंटी को शामिल किया है। जिसमें देश के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। हमने अपने घोषणा पत्र में युवाओं के लिए 30 लाख नौकरी देने का वादा किया है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।