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कांग्रेस ने PM मोदी और अमित शाह से इन ’10 सवालों’ के मांगे जवाब

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नई दिल्ली। कर्नाटक में एनडीए उम्मीदवार और हासन से सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े कथित अश्लील वीडियो मामले पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इस बीच कांग्रेस ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से ’10 सवालों’ के जवाब की मांग की है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और जनता दल (सेक्युलर) के नेता ‘सामूहिक दुष्कर्मी को बचा रहे हैं।’

बेलगावी में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबधित किया। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी और शाह से 10 सवालों के जवाब की मांग की है। सुरजेवाला ने यह भी दावा किया कि पीएम मोदी को ‘मामले की जानकारी थी’ लेकिन फिर भी उन्होंने जद (एस) के साथ गठबंधन किया।

सुरजेवाला ने रविवार को बेलगावी में संवाददाताओं से कहा, दिसंबर 2023 में एक भाजपा नेता ने सभी सबूतों के साथ पीएम मोदी और अमित शाह से संपर्क किया। इस मामले में हमारा संदेश स्पष्ट और सरल है। नरेंद्र मोदी जी और जद (एस) नेता एक सामूहिक दुष्कर्मी को बचा रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री को पता था कि उनकी पार्टी का उम्मीदवार और एक सहयोगी हजारों महिलाओं का सिलसिलेवार दुराचारी है।’

कांग्रेस ने पीएम मोदी और अमित शाह से पूछे ये 10 सवाल-
जनता दल (सेक्युलर) से हाथ क्यों मिलाया?
प्रज्वल रेवन्ना को भाजपा और जनता दल का उम्मीदवार क्यों बनाया?
पीएम मोदी ने हासन का दौरा क्यों किया और हाथ उठाकर कहा कि प्रज्वल रेवन्ना की जीत से उन्हें और ताकत मिलेगी?
सब कुछ जानने के बाद भी मोदी जी, अमित शाह जी, बीजेपी और जेडीएस ने प्रज्वल रेवन्ना के बारे में यह सच्चाई क्यों छिपाई?
जब प्रज्वल रेवन्ना भारत से बाहर भागने की कोशिश कर रहा था, तो क्या मोदीजी के विदेश मंत्रालय या पासपोर्ट नियंत्रण बोर्ड को नहीं पता था कि एक सामूहिक दुष्कर्मी देश से भाग रहा है? मोदी-जी और अमित शाह-जी ने उसे भागने की अनुमति क्यों दी ?
एसआईटी ने सीबीआई और मोदी सरकार को पत्र लिखा, मोदी जी या अमित शाह जी ने इसका जवाब क्यों नहीं दिया?
मुख्यमंत्री ने प्रज्वल रेवन्ना का राजनयिक पासपोर्ट रद्द अभी तक क्यों नहीं किया गया?
हमारी एसआईटी ने सीबीआई को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि वह इंटरपोल से ब्लू-कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए कहे ताकि हमें पता चल सके कि वह कहां है। मोदी जी ने ऐसा क्यों नहीं किया?
अगर कोई सामूहिक दुष्कर्मी देश छोड़कर भाग जाता है, तो उसे वापस लाने की ज़िम्मेदारी किसे लेनी चाहिए? राज्य सरकार या केंद्र सरकार? अगर यह केंद्र सरकार का काम है, तो मोदी-जी और अमित शाह-जी क्या कर रहे हैं?
आखिर प्रधानमंत्री मोदी प्रज्वल रेवन्ना से सवाल पूछने से इतना क्यों डरते हैं?
सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की है और इसे सुनिश्चित करने के लिए सीएम को पत्र लिखा है, साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री शाह से उनके ’10 सवालों’ का जवाब देने का आग्रह किया है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।