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कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने भाजपा को राजनीतिक माफिया बताया।

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इंदौर। लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस या आइएनडीआइ गठबंधन का उम्मीदवार मैदान में नहीं है। इसके बाद भी कांग्रेस हर चुनाव की तरह मतदान बूथों के पहले अपनी टेबले लगाएगी। साथ ही पोलिंग बूथों के भीतर मतदान अभिकर्ता भी बैठाए जाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर शहर और जिले के पदाधिकारियों को यह निर्देश दिए हैं। मंगलवार को गांधी भवन में पदाधिकारियों के साथ बंद कमरे में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। इसके पूरे प्रबंध देखने की जिम्मेदारी प्रदेश कांग्रेस ने ली है।

इससे पहले इंदौर लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार के मैदान के साथ पार्टी भी छोड़ने से पार्टी ही नहीं बल्कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर भी सवाल उठ रहे है। खुद प्रदेश अध्यक्ष की गृह क्षेत्र की सीट से कांग्रेस मैदान से ही विलुप्त कर दी गई है। ऐसे में मैदान में नहीं होने के बावजूद मैदान में दिखने की चुनौती कांग्रेस के सामने बनी हुई है। न केवल पटवारी की साख इंदौर में दांव पर है बल्कि संगठन को डर भी है कि ऐसी स्थिति में यदि संगठन मैदान में नजर नहीं आया तो जनता के बीच खराब संदेश जाएगा।

ऐसे में अगले पांच वर्ष यानी अगले चुनाव तक कांग्रेस के लिए स्थितियां और भी ज्यादा विपरीत हो जाएगी। मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी इंदौर के कांग्रेस कार्यालय में बैठक लेने पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं के बीच बोलते हुए पटवारी ने सिर्फ नोटा को लेकर बात की साथ ही भाजपा की दलबदल की राजनीति पर भी सवाल उठाया। इसके बाद वे कार्यालय के भीतर चुनिंदा पदाधिकारियों के साथ चर्चारत रहे।

प्रदेश अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरजीतसिंह चड्ढा, जिलाअध्यक्ष सदाशिव यादव, सेवादल अध्यक्ष मुकेश यादव समेत पदाधिकारी मौजूद थे। फैसला हुआ कि पोलिंग बूथों के अंदर कांग्रेस के कार्यकर्ता निर्दलीय उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट बनकर बैठाए जाएंगे। इसके लिए कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों से बात की जा रही है। एजेंट बैठाने के लिए तमाम प्रबंध भले ही वह भोजन पानी या मानदेय हो यह सब कांग्रेस की ओर से किया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ऐसा करना जरुरी है क्योंकि अंदर यदि विपक्षी मौजूद नहीं रहे तो बोगस वोटिंग का सहारा लेकर भाजपा अपने पक्ष में बड़े पैमाने पर वोट डलवाएगी।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने भाजपा को राजनीतिक माफिया बताया। उन्होंने उम्मीदवारों की खरीद और धमकाने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं से कहा कि वे नोटा के समर्थन में अभियान चलाए। इसके लिए इंटरनेट मीडिया ही माध्यम न बने बल्कि जमीन पर भी आंदोलन दिखे। शहर कांग्रेस ने घोषण की कि 10 मई को इंदौर में बड़ी रैली की जाएगी। यह रैली लोकतंत्र बचाओ समिति और इंडिया गठबंधन के बैनर तले निकाली जाएगी। जंजीरवाला चौराहे से शुरू होकर आंबेडकर प्रतिमा पर रैली पहुंचेगी। इस दौरान नोटा का बटन दबाने की अपील होगी। इसमें शामिल होने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।