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बोर्ड एग्जाम्स की तैयारी डेली रूटीन के साथ करें, टाईम मैनेजमेंट के साथ पढ़ाई करें… बिना हेजिटेशन के अपने वीक पॉइंट्स पर फोकस कर उन्हें दूर करें, एक्सपर्ट ने दिए सुझाव।

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नई दिल्ली। क्लास इलेवंथ और ट्वेल्थ में स्टूडेंट्स ने अच्छा स्कोर करने के लिए तैयारी अभी से शुरू कर दी है। ग्वालियर, मध्यप्रदेश के शिक्षकों ने स्टूडेंट्स के लिए बताया की वह कैसे तैयारी करें, कैसे अपना रूटीन बनाएं आदि। आईए आपको बताते हैं, क्या कुछ कहा एक्सपर्ट ने।

पढ़ाई के समय सिर्फ पढ़ाई पर ही फोकस करें, रेगुलर प्रैक्टिस और सही रूटीन ही दिलाएगा सफलता।

मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर की बायोलॉजी सब्जेक्ट की टीचर चित्रा विश्वनाथन के अनुसार बायोलॉजी सब्जेक्ट में अक्सर नाम बड़े होते हैं। जिससे स्टूडेंट को घबराने की जरूरत नहीं है। रेगुलर प्रैक्टिस से वह नाम स्वतः ही याद हो जाते हैं। वह उन नाम को ब्रेक करके भी याद रख सकते हैं। बायोलॉजी में डायग्राम पर फोकस जरूर करें, क्योंकि बायोलॉजी एक विजुअल सब्जेक्ट है। डायग्राम और फ्लो चार्ट को अच्छे से समझें।

उन्होंने यह भी कहा कि हर स्टूडेंट का डे प्लान, रूटीन और स्टडी करने का तरीका अलग-अलग हो सकता है। पर उन सभी को यह ध्यान में रखना चाहिए कि वह एक टाइम में एक ही काम करें। अगर वह पढ़ाई कर रहे हैं तो उसे वक्त वह सिर्फ पढ़ाई पर ही ध्यान दें, अन्य कहीं दिमाग न लगाएं। और अगर आप कोई अदर एक्टिविटी कर रहे हैं तो फिर उस एक्टिविटी पर ध्यान दें। स्टूडेंट को बहुत कंसंट्रेशन के साथ अपने रूटीन को फॉलो करना चाहिए।

शेड्यूल फॉलो करें, प्रेक्टिस करें…एग्जाम्स में क्वेश्चन सॉल्व करते समय टाइम मैनेजमेंट पर फोकस करें।

मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर की एकाउटेंसी सब्जेक्ट की टीचर डॉ मनप्रीत कौर ढींगरा ने कहा की स्टूडेंट्स का सिर्फ रूटिंग बनाना ही काफी नहीं है, उसे फॉलो करना सबसे ज्यादा जरूरी है। बहुत से स्टूडेंट्स खुद के बनाए रूटीन को पांच दिन फॉलो करते हैं, और उसके बाद रूटिंग फॉलो नहीं कर पाते हैं। लाइफ में एक शेड्यूल और रूटीन होना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। वहीं उन्होंने अकाउंटेसी सब्जेक्ट को लेकर कहा कि यह बेहद ईजी सब्जेक्ट है। इसमें भी शेड्यूल फॉलो करें, प्रेक्टिस करें। क्वेश्चन सॉल्व करते समय टाइम मैनेजमेंट पर फोकस करें। टाइम मैनेजमेंट पर फोकस इसलिए करना चाहिए कि हमें एग्जाम देते समय टाइम की कमी नहीं रहे। कई स्टूडेंट्स के एग्जाम छूट जाते हैं। क्योंकि वह टाइम मैनेजमेंट नहीं कर पाते हैं। हर क्वेश्चन के लिए टाइम फिक्स करें, कि इतने टाइम में यह क्वेश्चन सॉल्व होना चाहिए। जिससे आप पूरा पेपर भी अटेंड कर पाएंगे और मार्क्स भी अच्छे आएंगे।

वहीं उन्होंने इलेवंथ क्लास के स्टूडेंट को लेकर कहा कि टेंथ क्लास पास करके जो स्टूडेंट्स इलेवंथ क्लास में आते हैं, उनके पास उनका ऑब्जेक्टिव होता है कि हमें यह करना है। कॉमर्स ऐसा सब्जेक्ट है कि आप किसी भी स्टार्टअप में जा सकते हैं बैंकिंग सेक्टर, एनालिस्ट सेक्टर, टीचिंग सेक्टर आदि जा सकते हैं। पर सबसे पहले खुद की प्रतिभा को पहचान कर निर्धारित करें की आप क्या करना चाहते हैं। कॉमर्स ऐसा सब्जेक्ट है। जिसमें आपको बहुत सारी ऑपर्च्युनिटीज मिलती हैं।

अपनी प्रतिभा को पहचानें, बिना किसी हेजिटेशन के अपने वीक पॉइंट्स पर फोकस कर उन्हें दूर करें।

ग्वालियर की ही इंग्लिश लैंग्वेज एक्सपर्ट सुनीता शर्मा ने कहा कि जो स्टूडेंट्स अब इलेवंथ में आयेंगे, वह अभी फ्री हैं। क्योंकि उनकी बोर्ड की परीक्षाएं अभी खत्म हुई हैं। वह बिना किसी हेजिटेशन के बिना किसी डर के अपने वीक पॉइंट्स पर फोकस करें। पूरा साल अपने आप को बेहतर बनाने में झोंक दें, और अगले साल जब बोर्ड परीक्षा में जाएं तो अच्छा प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि इलेवंथ क्लास से जो स्टूडेंट्स आएंगे, उन्हें यह सोचना चाहिए के वह कौन सी स्ट्रीम लेना चाहेंगे। आजकल हर स्ट्रीम का अपना स्कोप है। स्टूडेंट्स जो भी सब्जेक्ट लें, वह अपने हिसाब से उसे चूज करें और सोच समझ कर लें। और अपने वीक पॉइंट्स पर वर्क करें।

सुनीता शर्मा ने कहा कि जो स्टूडेंट्स इलेवंथ क्लास से ट्वेल्थ क्लास में आए हैं। उनको बिना किसी फियर के यह बात समझनी चाहिए की यह भी एक सामान्य परीक्षा होती है। इसमें बस इतना अंतर होता है कि इनका क्वेश्चन पेपर बाहर से आता है। ठंडे दिमाग से इस परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। जब स्टूडेंट्स बोर्ड की परीक्षा की तैयारी करें तो उनको एक बात का ध्यान रखना चाहिए, कि वह एनसीईआरटी की बुक्स की तैयारी करें। स्टूडेंट्स जितनी अच्छी सेल्फ स्टडी करेंगे उनका प्रदर्शन उतना ही बेहतर होगा।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।