db News Network

Home » अखिलेश ने कोविड वैक्सीन को लेकर BJP पर साधा निशाना

अखिलेश ने कोविड वैक्सीन को लेकर BJP पर साधा निशाना

0 comments 21 views 2 minutes read

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में जीत का झंडा लहराने के लिए सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में मंगलवार को झांसी में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जनसभा को संबोधित किया। अखिलेश यादव ने कहा कि चार चरणों का चुनाव हो चुका है, जो साथी जानकार होंगे वो जानते होंगे भाजपा का ग्राफ गिरता जा रहा है। इस बार झांसी के लोग भाजपा की विदाई की झांकी तैयार कर रहे हैं।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इस भारतीय जनता पार्टी की सरकार में हमारा किसान परेशान हो गया। हमारे किसानों की लूट हो गई, जब किसान खाद की बोरी लेकर के आया, खाद की बोरी से भी चोरी हो गई और जब डीएपी किसान खरीदने गया तो नैनो यूरिया खरीदनी पड़ी।

जब भी उत्तर प्रदेश में कोई परीक्षा हुई इनका पेपर रद्द हुआ, जितनी परीक्षा हुई सबके पेपर लीक हुए। हम इंडिया गठबंधन के लोग भरोसा देकर जा रहे हैं 4 जून के बाद सरकार बनने जा रही है, न केवल नौकरी के मौके मिलेंगे, अग्निवीर योजना को समाप्त करेंगे।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा वालों ने जबरदस्ती लोगों को वैक्सीन लगवा दी, जिन्होंने वैक्सीन लगवाई है उनको दिल की बीमारी जल्दी हो जाएगी। सब दवाईयां महंगी हो गई, गरीबों को इलाज नहीं मिल रहा है। हम गरीबों के लिए राशन की गुणवत्ता बढ़ाएंगे, मात्रा बढ़ाएंगे, और आटा के साथ डाटा भी मुफ्त देंगे।
यूपीए सरकार आते ही कूड़े में फेंक देंगे अग्निवीर योजना: राहुल
कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र में यूपीए की सरकार बनते ही अग्निवीर योजना कूड़े में फेंक देंगे। एक को शहीद का दर्जा और दूसरे को नहीं ऐसा नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन संविधान की रक्षा कर रहा है। जबकि, भाजपा संविधान को नष्ट करना चाहती है।

राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अरबपतियों का 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया। जबकि, यूपीए की सरकार ने किसानों का 72000 करोड़ रुपये कर्ज माफ किया था। बोले कि जब यूपीए की सरकार बनेगी तो जितना कर्ज पीएम ने अरबपतियों का माफ किया है, उतना पैसा गरीबों के खाते में भेजेंगे। महालक्ष्मी योजना के तहत गरीब परिवारों की लिस्ट बनाएंगे। हर गरीब परिवार की एक महिला के बैंक खाते में हर महीने 8,500 हजार रुपए भेजेंगे। भाजपा ने 22 अरबपतियों को बनाया है, हम देश में करोड़ों लखपति बनाएंगे।
जीएसटी में बदलाव करेंगे, जिससे टैक्स कम हो। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में पिछले 10 सालों में एक लाख किसानों ने आत्महत्या की है। किसानों के साथ धोखा हुआ है। नौजवानों को नौकरी नहीं मिली है। बार-बार पेपर लीक हो जाते हैं। 4 जून के बाद इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी तो अग्नि वीर योजना खत्म करेंगे। महंगाई को काबू में करेंगे। कहा कि सपा के कार्यकर्ता मिलकर झांसी में कांग्रेस को जीतने का काम करेंगे।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।