db News Network

Home » मौसम विभाग की भविष्यवाणी, इन राज्यों के लिए भारी वर्षा का रेड अलर्ट

मौसम विभाग की भविष्यवाणी, इन राज्यों के लिए भारी वर्षा का रेड अलर्ट

0 comments 54 views 2 minutes read

भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी मौसम बुलेटिन के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और यह अरब सागर, गुजरात के कुछ और हिस्सों, महाराष्ट्र के शेष भाग, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्से, ओडिशा के शेष भाग और झारखंड के कुछ भाग में प्रवेश कर गया है। वहीं अगले 3-4 दिनों के दौरान उत्तरी अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार के शेष भाग, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ और हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।

विभाग की ओर से दिए गए अनुमान के अनुसार अगले 5 दिन के दौरान गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के तटीय इलाकों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश होने की संभावना है। कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश की भी संभावनाएं बन रही हैं। पश्चिमी तट में भारी बारिश का दौर लगातार बना रहेगा। हालांकि, दो दिन बाद गुजरात में भारी बारिश की संभावना नहीं है।

इधर, केरल के उत्तरी हिस्से, कर्नाटक के तटीय इलाकों और दक्षिणी हिस्सों में अत्याधिक भारी वर्षा की भी संभावना है, जिसे लेकर मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। मध्य भारत में मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में भारी बारिश देखने को मिल सकती है। 24 अप्रैल को पश्चिमी मध्य प्रदेश में तेज हवाओं और बिजली चमकने की परिस्थितियां बन सकती हैं। हालांकि, 25 और 26 अप्रैल को मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में ज्यादा बारिश की संभावना नहीं है।

उत्तर पश्चिम भारत में भी अगले 4 दिन भारी बारिश की संभावना नहीं है। आने वाले 3-4 दिनों में मानसून बिहार-झारखंड के लगभग सभी स्थानों तक पहुंच चुका होगा। पूर्वी उत्तर और उत्तराखंड में भी मानसून इस अवधि तक पहुंच जाएगा। बिहार में 25 तारीख से भारी से अत्याधिक भारी बारिश देखने को मिलेगी। झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी भारी बारिश देखने को मिल सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 26 से भारी बारिश हो सकती है। साथ ही प्रदेश के मध्य भागों में भी 26 जून से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। उत्तराखंड में 25 जून से भारी बारिश का दौर चालू होगा, जोकि 26 और 27 जून को भी देखने को मिलेगा। साथ ही पूर्वी राज्यों में भी 26 तारीख से भारी बारिश का दौर शुरू होगा।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।