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सीएम ने कहा – प्रभात झा ने जनीतिक जीवन में मीडिया के साथ आवश्यक समन्वय को हमेशा प्राथमिकता दी

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता प्रभात झा का गुरुवार सुबह 5 बजे दिल्ली के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा समेत कई दिग्गज नेताओं ने शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ नेता प्रभात झा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “प्रभात झा एक सजग जनप्रतिनिधि के साथ ही प्रख्यात लेखक और राष्ट्रवादी विचारक भी थे। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया, जिनमें राज्यसभा सदस्य और मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण रही।” मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झा ने अपने राजनीतिक जीवन में मीडिया के साथ आवश्यक समन्वय को हमेशा प्राथमिकता दी। वे निरंतर अध्ययन करते रहते थे और संगठन को सशक्त बनाने के लिए यादगार सेवाएं दीं। मुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल से स्वर्गीय प्रभात झा की आत्मा की शांति और उनके परिजनों, प्रशंसकों और विशाल मित्र समूह को यह दुख सहन करने की शक्ति देने के लिए प्रार्थना की है।

मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रभात झा के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। तोमर ने कहा, “प्रभात जी का निधन संगठन एवं समाज के साथ ही मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से अपूर्णीय क्षति है। हमारे संबंध सदैव अत्यधिक आत्मीय एवं प्रगाढ़ रहे हैं। प्रदेश में संगठन के कार्य करते हुए मैं हमेशा प्रभात जी से चर्चा और सलाह लेता रहा हूं। प्रभात जी लेखनी के धनी थे और उनके आलेख विचारोत्तेजक होते थे।” तोमर ने राष्ट्र-सेवा में आजीवन समर्पित रहे कर्मठ व्यक्तित्व प्रभात झा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और परिजनों व समर्थकों को यह आघात सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना ईश्वर से की है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा, “प्रभात जी ने अपना संपूर्ण जीवन संगठन के लिए समर्पित कर दिया। मध्य प्रदेश संगठन के विस्तार और उसे सुदृढ़ बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। समय-समय पर मुझे उनका मार्गदर्शन और स्नेह मिलता रहा है। उनका निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि।”

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।