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रेल हादसे, दिल्ली के राजेंद्र नगर में UPSC के छात्रों की हुई मौत, कांग्रेस ने सरकार पर बोला हमला

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इस अवसर पर भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने कहा कि आज सुबह झारखंड में मुंबई-हावड़ा मेल हादसे का शिकार हो गई। यह घटना अत्यंत दुखद है, प्रधानमंत्री मोदी ने मोदी ने रेल प्रणाली को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। 13 दिन में 7 रेल हादसे हो चुके है, आखिर इन हादसों का जिम्मेदार कौन है? खस्ता रेल व्यवस्था से देश में मौत का तांडव चल रहा है, लेकिन किसी की जवाबदेही तय नहीं हो रही। रेल मंत्री का जिम्मेदारी से दूर-दूर तक नाता नहीं है और मोदी तो अपनी दुनिया में मस्त हैं। जनता मरे तो मरे, इन्हें फर्क नहीं पड़ता। हम यह मांग करते है केंद्र सरकार इन हादसों की जवाबदेही तय करे, रेल मंत्री अपना इस्तीफा दे और पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा राशि उपलब्ध कराए केंद्र सरकार।

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने यह भी कहा कि वायनाड में जो तबाही मची है, वह दिल दहला देने वाली है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने और राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करे, जिसमें मुआवज़ा बढ़ाना और तत्काल मुआवजा देना शामिल है। इस कठिन समय में हम वायनाड के लोगो के साथ खड़े हुए है, हम ये मांग करते है कि हाल के वर्षों में भूस्खलन की घटनाओं में वृद्धि हुई है, इन कमज़ोर क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति को संबोधित करने के लिए केंद्र सरकार को एक व्यापक कार्य योजना जल्द से जल्द बनाना चाहिए।

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने यह भी कहा कि दिल्ली में कुछ कोचिंग सेंटर माफिया बन गए हैं। सरकार इनके खिलाफ कब कार्रवाई करेगी?, राजधानी दिल्ली में सरकार व प्रशासन की आपराधिक लापरवाही के चलते IAS कोचिंग सेंटर में बेसमेंट में पानी भर जाने से तीन युवाओं की ज़िंदगी चले जाना बेहद दुःखद है। दिल्ली को कांग्रेस ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर का शहर बनाया था। आज भारत की राजधानी उदासीनता का दंश झेल रही है। आये दिन हादसे होते रहते हैं। देश की राजधानी में इस तरह का हादसा होना हम सभी के लिए अत्यंत चिंता की बात है। हमें हमारी राजधानी को बेहतर बनाना होगा ताकि हमारे नागरिक सुरक्षित रहें और यहाँ रहने व आनेवालों को ये भरोसा हो कि देश की राजधानी में उनकी उपेक्षा नहीं होगी।

इस दौरान मार्च में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी व एआईसीसी सह सचिव कृष्णा अल्लावारू, युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी, कई युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारीगण, और अनेकों युवा कांग्रेस कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।