नई दिल्ली। हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट आने के बाद राजनीतिक दलों की तरफ से बयान आने शुरू हो गए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार अदाणी की सेबी जांच में हितों के सभी टकरावों को खत्म करने के लिए तुरंत कार्रवाई करे। पार्टी ने तर्क दिया कि देश के सर्वोच्च अधिकारियों की कथित मिलीभगत की निष्पक्ष जांच केवल जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) गठित करके ही कराई जा सकती है।
सेबी प्रमुख के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अब पता चला कि संसद की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए क्यों स्थगित कर दिया गया। संसद की बैठक 12 अगस्त तक निर्धारित थी, लेकिन उसे 9 अगस्त को ही स्थगित कर दिया गया। एक अन्य पोस्ट में रमेश ने सेबी प्रमुख पर निशाना साधा और रोमन कवि जुवेनल के ‘व्यंग्य’ से प्रेरित होकर लैटिन मुहावरे- ‘क्विस कस्टोडिएट इप्सोस कस्टोड्स’ का इस्तेमाल किया। उन्होंने पूछा कि पहरेदार की रखवाली कौन करेगा?
कांग्रेस के अलावा, तृणमूल कांग्रेस ने सेबी प्रमुख को घेरा है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर पोस्ट में उद्योगपति गौतम अदाणी पर भी निशाना साधा। उन्होंने इसे अदाणी स्टाइल बताते हुए आरोप लगाया कि सेबी चेयरमैन भी उनके समूह में निवेशक हैं। क्रोनी कैपिटलिज्म अपने चरम पर है। महुआ ने केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक को टैग कर सवाल किया कि क्या हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट आने के बाद POCA कानून और PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत मामला दर्ज कर जांच की जाएगी।





