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श्रीनिवास बीवी बोले – संकल्प, सद्भावना और दूरदर्शिता का नाम थे राजीव

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नई दिल्ली। भारतीय युवा कांग्रेस ने आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्व. राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर “हम में है राजीव” नामक एक भव्य समागम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित हुआ, जिसकी शुरुआत युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी और राष्ट्रीय प्रभारी कृष्णा अल्लावारु ने दीप प्रज्वलन से की। इस अवसर पर देशभर से युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता स्टेडियम में एकत्रित हुए। दीप प्रज्वलन के बाद, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए कई सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

आज के इस कार्यक्रम में कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और प्रतिष्ठित समाजसेवी भी शामिल हुए, जिन्होंने युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। एआईसीसी महासचिव सचिन पायलट, एआईसीसी मीडिया विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा, एआईसीसी महासचिव और लोकसभा सांसद तारिक अनवर, एआईसीसी राजीव गांधी पंचायत विभाग की चेयरमैन मीनाक्षी नटराजन, मणिपुर से लोकसभा सांसद डॉ. विमल, और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने राजीव गांधी के देश के प्रति योगदान को रेखांकित किया। इस अवसर पर, श्रीनिवास बी वी ने कहा कि राजीव गांधी ने अपने दृढ़ संकल्प से भारत को गौरवान्वित किया, और वे हमेशा देश के विकास, प्रगति, एकता और अखंडता में जीवित रहेंगे। उन्होंने राजीव गांधी को आधुनिक भारत का वास्तुकार बताते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शिता ने भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने कहा कि भारत रत्न राजीव गांधी आज भी हमारे बीच जीवित हैं। 40 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी ने आधुनिक भारत की नींव रखी। उन्हें डिजिटल इंडिया का आर्किटेक्ट और सूचना तकनीक व दूरसंचार क्रांति का जनक माना जाता है। उनकी पहल पर भारत में दूरसंचार नेटवर्क की स्थापना हुई, जिससे शहरों से लेकर गांवों तक संचार की पहुंच बनी, और गांव के लोग भी देश-दुनिया से जुड़ सके। राजीव गांधी ने देश में मताधिकार की उम्र सीमा को 18 वर्ष करके युवाओं को देश के प्रति अधिक जिम्मेदार और सशक्त बनने का अवसर दिया।

श्रीनिवास बी वी ने यह भी कहा कि राजीव गांधी का मानना था कि विज्ञान और तकनीक के बिना उद्योगों का विकास संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने देश में कंप्यूटर क्रांति लाने की दिशा में काम किया। राजीव गांधी ने पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त बनाने का कार्य किया, क्योंकि उनका विश्वास था कि जब तक यह व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र निचले स्तर तक नहीं पहुंच सकता। उन्होंने देश में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना की, ताकि गांवों के बच्चों को भी उत्कृष्ट शिक्षा मिल सके। मौजूदा समय में 551 नवोदय विद्यालयों में 1.80 लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। राजीव गांधी ने युवाओं और खेल को भी प्रोत्साहन दिया। वे हमेशा देश के नायक रहेंगे, अपनी शहादत, विचारों और आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में उन्हें याद किया जाएगा।

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी और एआईसीसी सह सचिव कृष्णा अल्लावारू ने कहा कि राजीव गांधी चाहते थे कि महिलाएं राजनीति में आगे आएं और सक्रिय रूप से भाग लें। उनका मानना था कि महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना आवश्यक है। अपने कार्यकाल में राजीव गांधी ने विदेश नीति, रक्षा नीति, आर्थिक सुधार, महिला और युवा सशक्तिकरण, और लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए। वे देश के हर युवा के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और हमेशा अमर रहेंगे।

“हम में है राजीव” समागम कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें युवा कांग्रेस के कई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, प्रदेश अध्यक्ष और देशभर से आए कार्यकर्ता शामिल हुए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।