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उत्तर प्रदेश की सियासत में कांग्रेस अब नए तेवर और कलेवर में आ रही नजर

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नई दिल्ली।।उत्तर प्रदेश की सियासत में कांग्रेस अब नए तेवर और कलेवर में नजर आ रही है। विधायक संख्या कम होने के बाद भी पार्टी जनता के बीच विपक्ष की भूमिका निभाने को बेताब है। हिरासत में मौत का मामला हो या बीमारी से बच्चों की मौत, बाढ़ पीड़ित हों या भेड़िए का आतंक, इन सभी मामलों में कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और उनकी टीम मौके पर पहुंची। इन मुद्दों को उठाते हुए जनता के बीच अपनी पैठ बढ़ाने का प्रयास किया। कांग्रेस की यह कवायद वोटबैंक में तब्दील होगी या नहीं, यह तो वक्त बताएगा।

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस त्रिस्तरीय रणनीति पर कार्य कर रही है। जनहित के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतर रही हैं। जालौन में हिरासत में किसान की मौत, कानपुर में पुलिस उत्पीड़न, बाढ़ पीड़ितों और भेड़िए के आतंक से परेशान लोगों के बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय मौके पर पहुंचे। लोगों का दर्द बांटा और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। इसके बाद सरकारी तंत्र सक्रिय हुआ। अब वह जिलेवार दौरे पर निकल गए हैं। प्रदेश की सियासत पर नजर रखने वालों का कहना है कि लंबे समय बाद कांग्रेस का कोई प्रदेश अध्यक्ष जिलेवार विभिन्न घटनाओं पर संघर्षशील नजर आ रहा है। इसी तरह आजमगढ़, उन्नाव में बीमारी से बच्चों की मौत का मामला खुद प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर उठाया।

सांसद और पार्टी के अन्य नेताओं ने मौके पर पहुंच कर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। अब यह मामला संसद में उठाने की तैयारी है। दो दिन पहले पहले प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सभी फ्रंटल संगठनों और जिलाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि जहां भी पुलिस का उत्पीड़न हो तत्काल मौके पर पहुंचे। किसी तरह की आपदा होने पर भी कांग्रेस की टीम मौके पर जाकर पीड़ितों की मदद करेगी। यह टीम तथ्यों सहित ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश मुख्यालय को भेजेगी। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद चतुर्वेदी कहते हैं कि जहां भी उत्पीड़न की घटनाएं हो रही हैं, वहां कांग्रेस की टीम पहुंच कर न सिर्फ दिलासा दे रही है बल्कि स्थानीय अधिकारियों से मिलकर पीड़ित को मदद दिलाने का भी प्रयास किया जा रहा है।

जनता के बीच विपक्ष की यही मुख्य भूमिका होती है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी खुद अर्जुन पासी की हत्या पर उसके परिजनों से मिलने पहुंचे। इसी तरह अमेठी, सीतापुर, बाराबंकी, प्रयागराज और सहारनपुर के सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के साथ ही अन्य जिलों में भी निरंतर सक्रिय हैं। इनकी सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस नए तेवर और कलेवर में उतरने की तैयारी में है।

विधानसभा को लेकर पार्टी संगठनात्मक दृष्टिकोण से अपने कील कांटे दुरुस्त कर रही है। जिलेवार समीक्षा करने के साथ ही सक्रिय कार्यकर्ताओं को चिन्हित किया जा रहा है। इसी तरह पार्टी के पिछड़ा, मुसलमान और दलित वर्ग के तीन युवा नेताओं को राष्ट्रीय कमेटी में शामिल करने के पीछे भी सियासी निहितार्थ माने जा रहे हैं। तीसरी कवायद वोटबैंक को लेकर है। राहुल गांधी के प्रयागराज में जाति जनगणना संबंधी बयान के बाद पार्टी खुलकर सामने आ गई है। जाति जनगणना को लेकर लगातार सम्मेलन हो रहे हैं तो भविष्य में कई ऐसे कार्यक्रम भी सामने आएंगे, जिसमें जाति आधारित गोलबंदी का प्रयास होगा।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।