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BJP की अंतर्कलह पर कांग्रेस का तंज, राज्य सरकार पर हमला

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भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा और सरकार के बीच सबकुछ सामान्य होने का दावा अक्सर किया जाता है, लेकिन कांग्रेस इसे मानने को तैयार नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा में आंतरिक मतभेद गहराए हुए हैं। हाल ही में कैबिनेट बैठक में सिंहस्थ की सड़कों के बजट को लेकर मंत्रियों के बीच हुई बहस का हवाला देते हुए कांग्रेस ने इसे “अंतर्कलह” करार दिया और भाजपा पर निशाना साधा।

कैबिनेट बैठक में क्या हुआ
कैबिनेट की बैठक में सिंहस्थ के तहत उज्जैन में बनने वाली सड़कों के लिए 2312 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। पीडब्ल्यूडी के अपर मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया। इस पर भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ये सड़के सिंहस्थ के फंड से बननी चाहिए। नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इसका समर्थन किया, लेकिन पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने सड़कों की लागत पर सवाल उठाते हुए कहा कि बजट इतना अधिक क्यों है?

वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ का फंड केवल 500 करोड़ रुपये है। विजयवर्गीय ने केंद्र से बजट बढ़ाने की मांग का सुझाव देते हुए कहा कि यदि उज्जैन के लिए इतनी बड़ी राशि आवंटित कर दी गई, तो प्रदेश की बाकी सड़कों के लिए फंड कहां से आएगा।

कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना
कैबिनेट की यह बहस सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने इसे भाजपा की गुटबाजी का उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी जनता के लिए नुकसानदेह है।

सिंहस्थ में घोटाले की आशंका
बारोलिया ने सवाल उठाया कि सिंहस्थ की सड़कों को लेकर कैबिनेट में विवाद यह संकेत देता है कि कहीं कोई बड़ा घोटाला तो नहीं होने वाला। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार न तो सुशासन दे पा रही है और न ही प्रदेश की जनता का भरोसा जीत पा रही है। जनता सब देख रही है और इसका जवाब समय आने पर देगी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।