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मप्र कैबिनेट बैठक में हुआ बड़ा फैसला — लाड़ली बहनों को अब मिलेंगे इतने रुपये

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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कश्यप ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। कैबिनेट ने लाडली बहना योजना की राशि बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। अब बहनों को 1250 रुपये के स्थान पर 1500 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है। मध्य प्रदेश में अभी 1.26 करोड़ लाडली बहने हैं। अभी तक लाडली बहनों को 44 हजार करोड़ रुपये की राशि दी गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव 12 नवंबर को सिवनी से राशि ट्रांसफर करेंगे। मंत्री ने लाडली बहना योजना में छूटे पात्र नाम जोड़ने के सवाल पर कहा कि समय पर सरकारी निर्णय लेंगे।

कैबिनेट ने किसानों के हित में भावांतर योजना को और मजबूत करते हुए 4036 रेट को लागू किया है। इसे प्रदेश में ‘रोल मॉडल योजना’ के रूप में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री 13 नवंबर को देवास से किसानों के खातों में भावांतर की राशि ट्रांसफर करेंगे।

जनहित में एक और अहम निर्णय लेते हुए कैबिनेट ने खंडवा जिले के मांधाता में जिला न्यायालय खोलने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इसके लिए सात नये पद सृजित किए गए हैं।

कैबिनेट ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राज्य स्तर पर मनाने का निर्णय लिया है। राज्य स्तरीय कार्यक्रम जबलपुर और आलीराजपुर में आयोजित होंगे, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली जुड़ेंगे। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कैबिनेट ने आदि शंकराचार्य को समर्पित ओंकारेश्वर एकात्म धाम परियोजना की पुनरीक्षित लागत को मंजूरी दी है। पहले इस परियोजना की लागत 2195 करोड़ रुपये थी, जिसे बढ़ाकर अब 2424.369 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें 228 करोड़ की लागत बढ़ गई है। साथ ही सभी शासकीय भवनों पर सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। अभी जिला स्तर पर शुरुआत होगी। जिला मुख्यालयों पर 20 किलोवाट के प्लांट लगेंगे। मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी क्रांति गौड़ को सरकार की तरफ से एक करोड़ रुपये की राशि दी गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 नवंबर को गुजरात के केवड़िया जाएंगे, जहां वे होने वाले विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस आयोजन में मध्य प्रदेश के 70 कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।