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ईरान पर हमलों के बाद अमेरिकी सीनेटरों ने की ट्रंप की तारीफ, कही यह बात

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नई दिल्ली। ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ हो रही है। अमेरिकी सीनेटरों ने ट्रंप के फैसले को सही और साहसिक करार दिया है। अमेरिका ने शनिवार रात को ईरान के नताज, फोर्डो और इस्फहान परमाणु ठिकानों पर हमला किया।

हमले के बाद साउथ कैरोलिना के सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक्स पर लिखा कि बहुत बढ़िया, राष्ट्रपति ट्रंप। टेक्सास के सीनेटर जॉन कॉर्निन ने कहा कि साहसिक और सही निर्णय। अलबामा के सीनेटर केटी ब्रिट ने हमले को मजबूत और सर्जिकल करार दिया। इसके अलावा ओक्लाहोमा के सीनेटर मार्कवेन मुलिन ने लिखा कि अमेरिका पहले, हमेशा।

वहीं सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष मिसिसिपी के रोजर विकर ने कहा कि ट्रंप ने ईरानी शासन की ओर से पैदा किए जा रहे खतरे को समाप्त करने के लिए जानबूझकर और सही निर्णय लिया है। विकर ने एक्स पर लिखा कि अब हमारे सामने अपने नागरिकों और सहयोगियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कई विकल्प हैं।

सीनेट के नेता जॉन थून ने कहा कि हम यह तय करने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं कि परमाणु हथियार ईरान की पहुंच से बाहर रहें। मैं राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खड़ा हूं और खतरे में पड़े अमेरिकी सैनिकों और कर्मियों के लिए प्रार्थना करता हूं। थून और सदन के अध्यक्ष माइक जॉनसन को शनिवार को हमलों से पहले ही जानकारी दे दी गई थी।

जॉनसन ने कहा कि सैन्य अभियान हमारे विरोधियों और सहयोगियों को स्पष्ट रूप से याद दिलाएगा कि राष्ट्रपति ट्रंप जो कहते हैं, वही करते हैं। हाउस इंटेलीजेंस कमेटी के अध्यक्ष रिक क्रॉफोर्ड ने कहा कि मैं व्हाइट हाउस के संपर्क में था और उन अमेरिकी सेवा सदस्यों का आभारी हूं जिन्होंने इन सटीक और सफल हमलों को अंजाम दिया।

डेमोक्रेटिक सहयोगियों से अलग हटकर पेंसिल्वेनिया के सीनेटर जॉन फेटरमैन ने भी ईरान पर हमलों की प्रशंसा की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि जैसा कि मैं लंबे समय से कहता रहा हूं, यह अमेरिकी राष्ट्रपति का सही कदम था। ईरान दुनिया में आतंकवाद का अग्रणी प्रायोजक है और उसके पास परमाणु क्षमता नहीं हो सकती।

कुछ सांसदों ने ट्रंप के फैसले का विरोध भी किया। केंटकी के प्रतिनिधि थॉमस मैसी ने ट्रंप के हमलों की घोषणा के बाद एक्स पर पोस्ट किया कि यह सांविधानिक नहीं है। कई डेमोक्रेट्स का मानना है कि कांग्रेस को इस मामले में अपनी बात कहने का अधिकार होना चाहिए। सीनेट में इस सप्ताह वर्जीनिया के सीनेटर टिम केन के प्रस्ताव पर मतदान होना था, जिसके अनुसार अमेरिका द्वारा ईरान पर युद्ध की घोषणा करने या कोई विशेष सैन्य कार्रवाई करने से पहले कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता होगी। कनेक्टिकट प्रतिनिधि जिम हिम्स ने एक्स पर पोस्ट किया कि संविधान के अनुसार हम दोनों ने रक्षा करने की शपथ ली है, इस मामले पर मेरा ध्यान बम गिरने से पहले आता है। पूर्ण विराम।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।