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भारत-पाक तनाव के बीच MP के सभी जिलों में अलर्ट, मोहन सरकार जारी की एडवाइजरी

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भोपाल। मध्यप्रदेश में गृह विभाग ने राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए प्रदेश के सभी जिलों के लिए एडवाइजरी जारी की है। कल देर रात जारी दिशा निर्देशों के अनुसार किसी भी इमरजेंसी जैसी स्थिति में सभी अस्पतालों में सभी प्रकार की जरूरी दवाईयां, मशीनें उपलब्ध रहें। डॉक्टर के साथ पूरा स्टाफ उपस्थित रहे और ब्लड बैंक में सभी ग्रुपों के रक्त की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध रहे। इसके साथ-साथ अलग-अलग अस्पतालों और स्कूलों में जनरेटरों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएं।

इसी प्रकार सोशल मीडिया पर पूर्ण निगरानी रखें और देश के विरुद्ध भड़काऊ पोस्ट अथवा सामग्री पर तुरंत कानूनी कार्रवाई करें, जिससे कि प्रदेश में माहौल खराब न हो। इस हेतु भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें। जिला प्रशासन सुनिश्चित करें कि आपात स्थिति में जिलों में पर्याप्त खादय सामग्री, पेट्रोल-डीजल, घरेलू गैस इत्यादि उपलब्ध रहें। लोग खाद्य सामग्री एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का अनावश्यक भण्डारण नहीं करें।

लोक स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि आपात स्थिति में पेयजल की पूर्ण व्यवस्था उपलब्ध रहे।जिलों के अति संवेदनशील स्थलों की सूची को अद्यतन करें, जिसमें अस्पताल, पावर प्लांट, तेल एवं गैस के डिपो, धार्मिक स्थल, भारत सरकार के संस्थान की जानकारी अद्यतन कर रखी जाए। जिलों में ग्राम एवं पंचायत स्तर पर नागरिक सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी जावे जिससे लोगों में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना बनी रहे। अग्निशमन सेवाओं को सक्रिय रखा जाए। इस हेतु उपकरणों की जांच इत्यादि कर ली जाए।

गृह विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि संचार सेवाओं को सुचारू बनाया जाए। इसके लिए दूरसंचार कंपनियों के साथ समन्वय करें। पब्लिक एड्रेस सिस्टम को पर्याप्त संख्या में चालू स्थिति में रखा जाए। आपदा प्रबंधन की मॉक ड्रिल एवं चेतावनी के परिप्रेक्ष्य में शहरों में सायरन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस हेतु स्थानीय प्रशासन, जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन आवश्यक समन्वय कर व्यवस्था सुनिश्चित करें। आपदा की स्थिति में गैर सरकारी संगठनों, राष्ट्रीय सेवा योजना और एनसीसी और सिविल स्वयं सेवकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाये ताकि राहत एवं बचाव कार्य में प्रभावी सहयोग मिल सकें। उद्योगों में उत्पादन सुचारू रूप से जारी रखा जाए। उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। लोक निर्माण विभाग सड़कें, पुलों की देखभाल एवं सुरक्षा सुनिश्चित करें। ऊर्जा विभाग विद्युत प्रदाय की निरंतर आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।