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आधी रात को CEC की नियुक्ति अपमानजनक, सियासी घमासान तेज

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नई दिल्ली। सरकार और विपक्ष के बीच देश के नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर शुरू हुआ विवाद तीखा होता दिख रहा है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पैनल से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनाई से पहले ही नए सीईसी को नियुक्त करने के सरकार के कदम की आलोचना करते हुए इसे संविधान और कानून की मर्यादा के खिलाफ बताया है।

सीईसी नियुक्ति पैनल की बैठक में अपनी असहमति जताने के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट में चयन प्रक्रिया को दी गई चुनौती पर सुनवाई के मद्देनजर प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री का आधी रात को नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का निर्णय अपमानजनक और अशिष्टतापूर्ण है।

विपक्ष ने सीईसी पर क्या दी दलील
कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े पैनल की वैधानिकता पर सुनवाई के बाद ही नए सीईसी की नियुक्ति किए जाने की मांग करती रही हैं। विपक्ष की दलील है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की बहुत बड़ी जिम्मेदारी चुनाव आयोग और सीईसी पर है।

बैठक में राहुल गांधी ने क्या उठाई बात
ऐसे में सरकार के बहुमत वाले पैनल के जरिए सीईसी की निष्पक्ष नियुक्ति नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार शाम सीईसी की नियुक्ति पैनल की हुई बैठक में नेता विपक्ष की हैसियत से शामिल हुए राहुल गांधी ने इसी बात को उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में 19 फरवरी को होने वाली सुनवाई के मद्देनजर ज्ञानेश कुमार को नया मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने के प्रस्ताव को स्थगित करने का अनुरोध किया था।

बैठक के कुछ घंटों बाद ही नियुक्ति की अधिसूचना जारी
हालांकि बैठक के कुछ घंटों के बाद ही देर रात ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त तथा विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी गई। प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री अमित शाह के अलावा नेता विपक्ष इस नियुक्ति पैनल के सदस्य होते हैं।

अनुरोध अस्वीकार किए जाने के बाद नेता विपक्ष ने बैठक में अपना असहमति नोट (डिसेंट नोट) दिया। राहुल गांधी ने एक्स पर मंगलवार को असमहति नोट साझा करते हुए कहा

राहुल ने आंबेडकर के भाषण का किया उल्लेख
स्वतंत्र चुनाव आयोग की स्थापना के संदर्भ में आंबेडकर के जून 1949 में संविधान सभा दिए भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा साहब ने तब भारत के लोकतंत्र और चुनाव आयोग के मामलों में कार्यपालिका के हस्तक्षेप को लेकर चेतावनी दी थी।

राहुल गांधी ने सरकार के कदम को बताया अनुचित
सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश की तीन सदस्यीय समिति द्वारा की जाने का फैसला दिया था। सरकार ने इसके बाद कानून में संशोधन करते हुए मुख्य न्यायाधीश की जगह गृहमंत्री को पैनल का सदस्य बनाने का निर्णय लिया। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले और भावना का घोर उल्लंघन है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।