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बाबा सिद्दीकी हत्या, शूटर ने बताया अनमोल बिश्नोई ने क्यों मरवाया

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता रहे बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। खबर है कि शूटर ने कबूल कर लिया है कि आखिर क्यों सिद्दीकी की हत्या की साजिश रची गई थी। उसने पुलिस को गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई का नाम भी बताया है। पुलिस ने इस मामले में 25 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

कुख्यात अपराधी अनमोल बिश्नोई ने ‘दाऊद इब्राहिम से संबंध और 1993 के मुंबई धमाकों में संलिप्तता’ को लेकर एनसीपी के नेता बाबा सिद्दीकी पर हमला करने का आदेश दिया था। सिद्दीकी पर हमले के आरोपी मुख्य शूटर शिवकुमार गौतम ने पुलिस को दिए अपने इकबालिया बयान में यह बात कही।

गौतम का इकबालिया बयान महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री सिद्दीकी की 12 अक्टूबर को हुई हत्या के सिलसिले में दायर आरोपपत्र का हिस्सा है। मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में सिद्दीकी (66) की उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

गौतम ने यह भी दावा किया कि उसे बाबा सिद्दीकी या जीशान सिद्दीकी को मारने के लिए कहा गया था और इसके बदले उसे 15 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। उसने पुलिस को बताया है कि वह पुणे में कबाड़ इकट्ठा करता था और सह-आरोपी हरीश कुमार कश्यप को सामान बेचता था।

उसने पुलिस को बताया कि कबाड़ की दुकान संचालित करने वाले कश्यप ने उसके रहने की व्यवस्था की थी और इसी दौरान उसकी जान-पहचान प्रवीण लोनकर और उसके भाई शुभम लोनकर से हुई।

गौतम ने इकबालिया बयान में कहा, ‘एक दिन शुभम लोनकर ने शूटर को बताया कि वह और उसका भाई बिश्नोई गिरोह के लिए काम करते हैं। जून 2024 में शुभम लोनकर (शुब्बू) ने मुझे और धर्मराज कश्यप (सह-शूटर) को बताया कि अगर हम उसके कहने पर काम करेंगे तो हमें 10 से 15 लाख रुपये दिए जा सकते हैं। जब मैंने काम के बारे में पूछा तो शुभम ने हमें बताया कि हमें बाबा सिद्दीकी या उसके बेटे ज़ीशान सिद्दीकी को मारना है। लेकिन उसने कोई और जानकारी नहीं दी।

फ्लैट देने का वादा
मुंबई पुलिस ने सिद्दीकी की हत्या के मामले में आरोपपत्र दायर कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चार्जशीट में कहा गया है कि अनमोल की अगुवाई चलाए जाने वाले अपराध सिंडिकेट ने सिद्दीकी की हत्या की थी। आरोपी ने पुलिस को अनमोल के साथ हुई बातचीत के बारे में बताया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत का एक अंश है, ‘राम राम भाई लोग आप सबको लॉरेंस भाई ने भी राम राम बोलने को बोला है। क्या चल रहा है। अपने को एक काम करना है, हिम्मत रखो। बांद्रा में घर के पास रेकी करना है, उसी एरिया में घर भाड़े से ले लो। अपना काम होने के बाद एक फोर व्हीलर गाड़ी और एक फ्लैट हर एक को मिलेगा…। उससे पहले 5 लाख रुपये एडवांस दूंगा। अपने भाई का बदला लेना है। अपने को धर्म के लिए जीने का है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने दावा किया है कि ये बातचीत शुभम लोनकर और अनमोल के बीच स्पीकर पर हुई है और उस दौरान तीन और आरोपी भी मौजूद थे। चार्जशीट में कहा गया है कि अनमोल ने इस हत्या की प्लानिंग अपने सहयोगी अनुज थापन की मौत का बदला के तौर पर की थी।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।