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PM मोदी के बिहार दौरे से पहले तेजस्वी यादव ने पूछे 12 सवाल

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बिहार दौरे पर हैं। वे सीवान के पचरुखी प्रखंड के जसौली में आयोजित रैली में जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। इस मौके पर पीएम बिहार को करीब दस हजार करोड़ की सौगात भी देंगे। पीएम के बिहार दौरे पर सियासत चरम पर है। नेता प्रतिपक्ष और लालू की पार्टी राजद के युवराज तेजस्वी यादव ने पीएम से 12 सवाल पूछा है। सोशल मीडिया पर तेजस्वी यादव ने पोस्ट कर नरेंद्र मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार को घेरा है। उन्होंने एनडीए का नया फुल फॉर्म भी बताते हुए बिहार में विभिन्न आयोगों के गठन पर भी तंज कसा है है।

सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर तेजस्वी यादव ने जो सवाल पीएम मोदी से किए हैं उनका जवाब भाषण में देने का भी आग्रह किया है। तेजस्वी यादव के सवाल इस प्रकार हैं-

𝟏. आप विगत चुनावों में झूठ की चाशनी में लिपटी 𝟐𝟎𝟎 से अधिक रैलियों को संबोधित कर बिहारियों को भ्रमित करने के सारे पैमाने तोड़ चुके है। हमारा विनम्र आग्रह है कि बिहार आने से पहले आप अपने पूर्व के भाषणों और वादों का अवलोकन व विश्लेषण करें। मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ कि आप स्वयं के भाषण सुन शर्मिंदगी के चलते खुद से ही बात नहीं कर पाएंगे? क्या आप इस आग्रह को स्वीकार करेंगे?
𝟐. क्या आप फिर 𝟐𝟎𝟏𝟓 से निरंतर की जा रही घोषणाओं के दिखावटी शिलान्यास, उद्घाटन और कार्यारंभ की पुनरावृत्ति करेंगे?
𝟑. क्या आप बिहारवासियों को स्पष्टीकरण देंगे कि बिहार में 𝟐𝟎 वर्षों से एवं केंद्र में 𝟏𝟏 वर्षों से 𝐍𝐃𝐀 की डबल इंजन पॉवर्ड सरकार रहने के बावजूद आपके अपने नीति आयोग एवं भारत सरकार की अनेक मानक एजेंसियों की रिपोर्ट में बिहार गरीबी, बेरोजगारी, प्रति व्यक्ति आय, निवेश, साक्षरता दर एवं औद्योगीकरण में देश में सबसे फिसड्डी राज्य क्यों है?
𝟒. क्या आप सारण प्रमंडल वासियों को बतायेंगे कि श्री लालू प्रसाद जी ने इस प्रमंडल में असंख्य विकास कार्यों सहित जेपी विश्वविद्यालय की स्थापना, तीन बड़े रेलवे कारख़ाने स्थापित किए थे? मढ़ौरा में लालू जी द्वारा स्थापित रेल इंजन कारखाने से अब विदेशों में भी इंजन भेजे जा रहे है?
𝟓. क्या आप बिहारवासियों को बतायेंगे कि 𝐍𝐃𝐀 के 𝟐𝟎 वर्षों के शासनकाल में 𝟔𝟓,𝟎𝟎𝟎 से अधिक निर्दोष लोगों की हत्याएं हुई है? 𝟐𝟓,𝟎𝟎𝟎 लड़कियों के साथ बलात्कार हुए है? क्या आप 𝐍𝐃𝐀 के राक्षसराज की यह उपलब्धि बताने में शरमायेंगे या इसे भूल जाएंगे?
𝟔. क्या आप देशवासियों को बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की अचेत अवस्था की जानकारी देंगे जैसे कि आप ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नवीन पटनायक जी के बारे में बताते थे?
𝟕. क्या आज की रैली में आप 𝐍𝐃𝐀 (नेशनल दामाद आयोग) में मनोनीत गठबंधन के जमाईयों को सम्मानित करेंगे?
𝟖. क्या आप बिहार की ध्वस्त विधि व्यवस्था के चलते मुख्यमंत्री आवास और राज भवन के बाहर होने वाली गोलीबारी की घटनाओं की निंदा करने का साहस जुटायेंगे या सुविधाजनक तरीके से 𝟐𝟎 वर्षों की सरकार की विफलता को नजरअंदाज करते हुए इसके लिए त्रेता अथवा द्वापर युग में विचरण करते हुए विपक्षियों को कोसेंगे?
𝟗. क्या आप 𝟐𝟎 वर्षों की 𝐍𝐃𝐀 सरकार में हुए 𝟐 लाख करोड़ से अधिक की लूट के 𝟏𝟎𝟎 से ज्यादा घोटालों को गिनायेंगे? सनद रहे पूर्व में आप नीतीश कुमार जी के 𝟑𝟑 घोटालों को तो स्वयं अपने मुखारविंद से गिना चुके है?
𝟏𝟎. क्या आप अपने मुखारविंद से गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, रिश्वत खोरी, पलायन, पेपर लीक और डोमिसाइल नीति जैसे दिव्य, विचारपूर्ण और ज्वलंत मुद्दों का जिक्र करेंगे?
𝟏𝟏. प्रचंड गर्मी में कई जिलों के कर्मचारियों को भीड़ लाने के लिए 𝐍𝐃𝐀 सरकार प्रताड़ित क्यों कर रही है? क्या आप नहीं जानते कि आशा कार्यकर्ता, ममता, आंगनवाड़ी सेविका/सहायिका, जीविका दीदी, विकास मित्र, किसान सलाहकार, तालीमी मरकज़, शिक्षा मित्र, टोला सेवक, शिक्षक इत्यादि पर प्रशासन का अपने खर्चे से भीड़ लाने का दबाव है? आपकी रैली के लिए गरीब इतने कम मानदेय में कैसे गाड़ी का प्रबंध करेंगे? प्रशासन और आपकी रैली के आयोजनकर्ता गरीब कर्मचारियों से गाड़ी के ड्राइवर और गाड़ी का नंबर माँग कर उनको आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित क्यों कर रहे है।
𝟏𝟐. सिवान में क्या आप बतायेंगे कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकियों एवं आतंकियों के संरक्षक पाकिस्तान को कड़ा सबक़ सिखाने की ओर अग्रसर एवं आतुर हमारी बहादुर भारतीय सेना और पराक्रमी वीर जवानों को ट्रंप के सीज़फायर के आदेश पर क्यों रोका गया? विशेषत: जब सारा देश और विपक्ष सरकार एवं सेना के साथ खड़ा था। आपके डियर फ्रेंड ट्रंप ने आपसे पहले ही सीज़फायर की घोषणा क्यों की? हमारे मामलों में पंचायती करने वाला ये ट्रंप होता कौन है?

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।