भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से कहानीकार, ट्यूटर और शिक्षक मीनाक्षी अद्देपल्ली, तथा फुनशाला खेलघर प्री-स्कूल की शिला पुरोहित ने मिलकर एक अनूठी सांस्कृतिक पहल ‘अनेक चिड़िया’ की शुरुआत की है। इस सामूहिक कहानी मंच का उद्देश्य है— कहानियों को फिर से आमने-सामने सुनने और सुनाने की पुरानी परंपरा को जीवंत करना, जो आज की डिजिटल दुनिया में लगभग लुप्त हो चुकी है। मीनाक्षी बताती हैं कि पुरानी पीढ़ियों में जहां शाम होते ही लोग पेड़ों के नीचे इकट्ठा होकर किस्से साझा करते थे, वहीं आजकल कहानियाँ मोबाइल स्क्रीन में सिमटकर रह गई हैं। “हम वही संस्कृति वापस लाना चाहते हैं… वो मानवीय जुड़ाव, वो कल्पना का संसार, जहाँ हर चेहरा एक कहानी था”, वे कहती हैं।
‘अनेक चिड़िया’ की शुरुआत जून 2025 में हुई, और तब से यह भोपाल में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अब तक छह सामुदायिक स्टोरी-सेशन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें लोग पार्कों में एक गोल घेरे में बैठकर किसी तय थीम पर कहानियाँ साझा करते हैं। इस मंच की विशेषता है कि यहाँ कोई बंधन नहीं — जिसे कहानी सुनानी हो, वह आगे आए; जिसे सुननी हो, वह दिल खोलकर सुने। इस बार 21 दिसंबर को अरेरा कॉलोनी में एक बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है, जो खास इसलिए है क्योंकि पहली बार केवल बड़ों के लिए कहानी प्रतियोगिता रखी गई है। इसमें तीन कैटेगरी— लॉजिकल, मिथोलॉजिकल और मोटिवेशनल— बनाई गई हैं। प्रत्येक प्रतिभागी को 4 मिनट का समय मिलेगा ताकि पूरा आयोजन रोचक और संक्षिप्त रहे।
वहीं शिला पुरोहित कहती हैं कि बच्चों और बड़ों दोनों में विज़ुअल कंटेंट की भरमार ने कल्पनाशक्ति को कमजोर किया है, जबकि कहानियाँ कल्पना को उड़ान देती हैं। “जब हम कहानी सुनते हैं, तो हम अपने दिमाग से दुनिया बनाते हैं — जंगल, शहर, पात्र… सब अपनी कल्पना से। यही क्षमता आज घट रही है, और ‘अनेक चिड़िया’ उसे फिर से जीवित करने का प्रयास है”, वे कहती हैं।
टीम का कहना है कि यह पहल किसी धर्म, विशेष समुदाय या क्षेत्र तक सीमित नहीं है; बल्कि दुनिया भर की मिथकों, लोककथाओं और व्यक्तिगत अनुभवों को एक साथ मंच देती है। सांस्कृतिक संवाद, स्मृति और रचनात्मकता को बढ़ावा देने वाली इस पहल की भोपाल में खूब सराहना हो रही है।





