भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की यशिका सातनकर ने देश का नाम रोशन करते हुए मिस सुपर मॉडल यूनिवर्स करिज़्मा का खिताब अपने नाम किया है। बचपन में रंग-रूप को लेकर तानों का सामना करने वाली करिश्मा ने कभी हार नहीं मानी और अपने आत्मविश्वास के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया। उन्होंने बताया कि जब वह 15-16 साल की थीं, तब उनके रंग को लेकर अन्य लड़कियां चिढ़ाती थीं, जिससे वह बेहद दुखी हो जाती थीं। उस समय उनकी मां ने उन्हें प्रेरित करते हुए कहा कि “सुंदरता गोरे या काले रंग से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और व्यक्तित्व से तय होती है।” तभी से उन्होंने मॉडलिंग को अपना सपना बना लिया।
यशिका ने बताया कि उनके पिता शुरू में मॉडलिंग को लेकर ज़्यादा सहमत नहीं थे, लेकिन यशिका लगन और समर्पण को देखकर अंततः उन्होंने बेटी को आगे बढ़ने की अनुमति दी। यशिका कहती हैं, “मैं हर शाम खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती थी। जब पापा ने कहा कि अगर तुम्हारा मन है तो करो, मैंने उसी पल ठान लिया कि मुझे भारत का नाम ऊँचा करना है।” उन्होंने भोपाल का प्रतिनिधित्व करते हुए ‘मिस इंडिया सुपर मॉडल यूनिवर्स’ का खिताब जीता और इसके बाद चीन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत की ओर से हिस्सा लिया। यशिका ने गर्व से बताया कि चीन में लगे उनके बिलबोर्ड पर ‘मिस इंडिया यशिका’ लिखा देखकर उन्हें अपार गर्व महसूस हुआ।
भारत लौटने के बाद करिश्मा ने कहा कि “भारत की महिलाएं आज हर क्षेत्र — शिक्षा, खेल, कला और ग्लैमर — में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैंने इस मंच पर भारत का नाम रोशन किया।” आगे की योजनाओं पर उन्होंने कहा कि वह अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी इंग्लिश लिटरेचर में पूरी करना चाहती हैं, साथ ही अपने माता-पिता का सपना साकार करना चाहती हैं। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “मैंने अपनी बात रखी, पापा ने मेरी, अब मेरी जिम्मेदारी है कि मैं दोनों का मान रखूं — पढ़ाई में भी और अपने करियर में भी।”





