db News Network

Home » मटियामहल सीट पर बड़ा उलटफेर, पूर्व MLA असीम अहमद खान ने कांग्रेस जॉइन की

मटियामहल सीट पर बड़ा उलटफेर, पूर्व MLA असीम अहमद खान ने कांग्रेस जॉइन की

0 comments 56 views 2 minutes read

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच मटियामहल सीट पर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। मटियामहल विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक असीम अहमद खान कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब आप की ओर से घोषित मटियामहल सीट के उम्मीदवार शोएब इकबाल को बदले जाने की चर्चाएं चल रही हैं। बता दें कि साल 2015 के चुनाव में असीम अहमद खान ने AAP के टिकट पर चुनाव लड़कर शोएब इकबाल को करीब 26 हजार मतों के अंतर से हराया था।

हाल ही में मटियामहल विधानसभा सीट से AAP के उम्मीदवार शोएब इकबाल ने कुछ वजहों का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। उन्होंने यह भी कहा था कि केजरीवाल ने उनकी जगह उनके बेटे आले इकबाल को AAP का उम्मीदवार बनाने की बात कही है। शोएब इकबाल के बयान से चर्चाएं तेज हो गई थीं कि AAP इस सीट से उम्मीदवार बदल सकती है। आले इकबाल निगम पार्षद हैं। वह डिप्टी मेयर भी रह चुके हैं।

गौर करने वाली बात यह कि कांग्रेस ने मटियामहल सीट से अभी तक उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है। पूर्व विधायक असीम अहमद खान भी क्षेत्र के दमदार नेता माने जाते हैं। वह 2015 के चुनाव में शोएब इकबाल को बड़े अंतर से हरा भी चुके हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस उनको टिकट देती है तो इस विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद रोचक हो जाएगा। पिछली बार शोएब इकबाल कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे और इस सीट पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी।

पिछले चुनाव में इस सीट पर शोएब इकबाल को 67,250 जबकि BJP के रविंदर गुप्‍ता को 17024 वोट मिले थे। कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही थी और उसके उम्‍मीदवार मिर्जा जावेद अली को 3403 मतों से संतोष करना पड़ा था। चूंकि इस बार कांग्रेस AAP का खेल खराब करने के मूड में नजर आ रही है। उसने केजरीवाल के सामने संदीप दीक्षित को उतारा है। उसे मटियामहल में दमदार उम्मीदवार की तलाश थी। अब जब असीम अहमद ने उसका हाथ थामा है तो कांग्रेस उन्हें मौका देकर AAP को कड़ी चोट दे सकती है।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।