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BJP का केजरीवाल पर हमला, महिला सम्मान योजना’ में 21 रुपये भी नहीं देने का इरादा

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नई दिल्ली। दिल्ली की पूर्व सांसद और भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने रविवार को ‘महिला सम्मान योजना’ को लेकर आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार पर हमला बोला। मीनाक्षी लेखी ने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल का दिल्ली की महिलाओं को 21 रुपये भी देने का भी कोई इरादा नहीं है।

दिल्ली सरकार पर हमला बोलते हुए भाजपा नेता ने दावा किया कि महिलाओं और दिव्यांगों को दिल्ली सरकार द्वारा पहले से स्वीकृत पेंशन नहीं मिल रही है।

मीनाक्षी लेखी ने कहा, “मैं सबसे पहले विधवाओं और दिव्यांगों से पूछना चाहूंगी कि क्या उन्हें पेंशन मिल रही है, क्योंकि मुझे जो फीडबैक मिल रहा है, उसके अनुसार लोगों को दिल्ली सरकार द्वारा पहले से स्वीकृत पेंशन नहीं मिल रही है… मुझे हैरानी है कि अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत 2100 रुपये बोले, उन्हें 21,000 रुपये कहना चाहिए था, क्योंकि उनका 21 रुपये भी देने का कोई इरादा नहीं है।

वहीं, एक अन्य भाजपा नेता और एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने भी ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ की घोषणा की आलोचना की, जिसमें दिल्ली की महिलाओं को 2100 रुपये हर महीने देने का वादा किया गया है। उन्होंने इसे आम आदमी पार्टी चीफ अरविंद केजरीवाल की ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताया।

चहल ने केजरीवाल के वादों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब चुनावों के दौरान ‘आप’ द्वारा किए गए ऐसे वादे अब तक पूरी नहीं हुए हैं।

चहल ने कहा, “उन्होंने पंजाब चुनावों के दौरान भी ऐसा ही वादा किया था। क्या पंजाब में महिलाओं के खातों में 2100 रुपये की राशि जमा की गई है? वह उनसे फॉर्म भरवाएंगे, लेकिन इससे कुछ नहीं होगा। उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि क्या चुनाव से पहले किसी को कोई पैसा मिलेगा या नहीं।

फरवरी में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले रविवार को केजरीवाल ने ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ और ‘संजीवनी योजना’ के लिए आज से रजिस्ट्रेशन शुरू करने की घोषणा की है। महिला सम्मान योजना के तहत दिल्ली में रहने वाली महिलाओं को 2100 रुपये हर महीने दिए जाएंगे। केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आपको कहीं भी लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। हम रजिस्ट्रेशन करने के लिए खुद आपके पास आएंगे। महिलाओं को रजिस्ट्रेशन में सहायता करने और उन्हें कार्ड प्रदान करने के लिए दिल्लीभर में टीमें बनाई गई हैं।

संजीवनी योजना के लिए आज से शुरू होने वाले रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य 60 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के इलाज के खर्च को कवर करना है।

केजरीवाल ने कहा कि हमारी टीम संजीवनी योजना और महिला सम्मान योजना के लिए लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन करने के लिए घर-घर जाएगी। रजिस्ट्रेशन के लिए दिल्ली का वोटर आई कार्ड होना अनिवार्य है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।