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देश के अधिकतर हिस्सों में बारिश-ओलावृष्टि के आसार, IMD का अलर्ट- आंधी-तूफान की भी आशंका

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नई दिल्ली। मौसम के बदले मिजाज से लोगों को प्रचंड गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग ने 8 मई तक दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर पश्चिम भारत के साथ ही देश के अधिकतर हिस्सों में गरज के साथ बारिश होने, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान जारी रहने की संभावना जताई है। हालांकि, ओडिशा, पश्चिम बंगाल के गंगा के तटवर्ती इलाकों के साथ ही देश के पूर्व मध्य और पूर्वी इलाकों में गरज के साथ वर्षा की मौजूदा गतिविधियों में 7 मई के बाद से कुछ कमी आ सकती है। उधर, ऑरेंज अलर्ट के बीच हिमाचल में कई जगह झमाझम बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। चंबा जिले के चेली गांव के डोंडरा नाला में शनिवार रात बादल फटने से एक 65 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति की नाले में बहने से मौत हो गई। बाढ़ में 150 भेड़-बकरियां भी नाले में बह गईं।

कुछ स्थानों पर 70-100 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलीं
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, रविवार सुबह 8:30 बजे तक बीते 24 घंटे के दौरान पूर्वी राजस्थान, मध्य भारत, ओडिशा, झारखंड में कुछ स्थानों पर 70-100 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलीं और कुछ जगहों पर धूल भरी आंधी आई। गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान में भी 40-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं।

ओलावृष्टि के साथ-साथ बारिश का भी कहर
पश्चिम बंगाल के गंगा के तट वाले इलाकों, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नगालैंड, त्रिपुरा, तमिलनाडु पुडुचेरी और कराईकल, केरल और माहे, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तेलंगाना में अलग-अलग स्थानों पर आंधी-तूफान का असर रहा। वहीं, उत्तराखंड, पश्चिमी राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में अलग-अलग स्थानों पर ओलावृष्टि हुई, जबकि ओडिशा और मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई। इससे तापमान में 2-3 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है।
पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय बदलेगा मौसम का मिजाज
आईएमडी ने बताया कि उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे पंजाब और उत्तर-पश्चिम राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। इसके प्रभाव से 10 मई तक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं के साथ मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान राजस्थान में भी छिटपुट बारिश होने की संभावना है। 7 मई तक पश्चिमी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। 6-8 मई के दौरान पश्चिमी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। 6 मई तक बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की संभावना है।

लाहौल की ऊंची चोटियों पर हुई बर्फबारी
राजधानी शिमला में दोपहर बाद गरज के साथ झमाझम बारिश और ओलावृष्टि हुई। लाहौल में चोटियों पर बर्फबारी और कई क्षेत्रों में बारिश हुई है। कुल्लू में शनिवार रात से शुरू हुई बारिश रविवार सुबह तक जारी रही। 9 घंटे हुई बारिश से जगह-जगह जलभराव हो गया। इसके अलावा रामपुर, सोलन, कांगड़ा, बिलासपुर, सिरमौर मंडी में भी बारिश-अधंड़ और ओलावृष्टि हुई। मौसम में बदलाव से तापमान में 4-6.5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है।

उत्तराखंड में भारी बारिश की चेतावनी
उत्तराखंड में अगले तीन दिन भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना है। इसको देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर खराब मौसम के मद्देनजर सतर्क रहने को कहा है। पत्र में लिखा है कि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार राज्य के अलग-अलग हिस्सों में गर्जन के साथ बिजली चमकने/वर्षा के तीव्र दौर, ओलावृष्टि व कहीं-कहीं 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकदार हवाएं चल सकती हैं। इस स्थिति में अपने जिलों में सावधानियां सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों की सुरक्षा के दृष्टिगत विद्यालयों में सावधानी बरती जाए। असामान्य मौसम, भारी वर्षा की चेतावनियों के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों के आवागमन की अनुमति न दी जाए।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।