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कांग्रेस ने मोदी सरकार को दिया चैलेंज, जयशंकर का भी लिया नाम

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नई दिल्ली। अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस के साथ सोनिया गांधी का रिश्ता जोड़ने पर कांग्रेस भड़क गई है। इस मसले पर संसद में भी सोमवार को खूब हंगामा हुआ था और भाजपा सांसदों ने सवाल किया था कि आखिर देश के खिलाफ जो लोग हैं, उनसे ही क्यों कांग्रेस का रिश्ता निकलता है। भाजपा का आरोप था कि सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले फाउंडेशन को जॉर्ज सोरोस से फंडिंग मिलती है, जो कश्मीर को अलग करना चाहता है। इस मसले पर बैकफुट पर दिख रही कांग्रेस भी अब आक्रामक हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तो जॉर्ज सोरोस के मामले पर सीधे मोदी सरकार को ही चैलेंज कर दिया है।

पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, ‘अपने दोस्त को बचाने के लिए मोदी जी भारत के मित्र देशों से रिश्ते ख़राब कर रहे हैं और भारत के शत्रु देशों को क्लीन चिट दे देते हैं। सोरोस अगर इतना बड़ा मुद्दा है तो प्रत्यर्पण की कार्यवाही कीजिए। और यह भी बता दीजिए कि भाजपा के किस किस नेता के बच्चों को विदेशों में शिक्षा के लिए किस फाउंडेशन से स्कालरशिप मिली?’ यही नहीं उन्होंने भाजपा नेताओं से जुड़े दो फाउंडेशन की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाया और आरोप लगा दिया कि इन्हें चीन से पैसा मिलता है।

कांग्रेस लीडर ने लिखा, ‘इंडिया फाउंडेशन और विवेकानंद फाउंडेशन को चीन से कब और कितना पैसा मिला? एस्पेन इंस्टिट्यूट से एस. जयशंकर के पुत्र के क्या संबंध रहे? जर्मन मार्शल फण्ड से उनके क्या संबंध रहे? उक्त दोनों संस्थाओं के जॉर्ज सोरोस से क्या संबंध हैं?’ दरअसल भाजपा ने सोमवार को दावा किया था कि ‘फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक लीडर्स इन एशिया पैसिफिक (एफडीएल-एपी) फाउंडेशन’ की सह-अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी, जॉर्ज सोरोस फाउंडेशन द्वारा वित्तपोषित संगठन से जुड़ी हुई हैं। पार्टी का कहना था कि यह संगठन जम्मू-कश्मीर को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की बात करता है। ऐसे में इस देशद्रोही संगठन से सोनिया गांधी का जुड़ा होना चिंताजनक है।

हंगरी में एक यहूदी परिवार में जन्मे जॉर्ज सोरोस ने लंबा वक्त ब्रिटेन में गुजारा है। फिलहाल वह अमेरिकी कारोबारी हैं और दुनिया के टॉप अमीर लोगों में से एक हैं। उन पर यह आरोप भी लगते रहे हैं कि अपने धन का इस्तेमाल करके उन्होंने कई सरकारों को अस्थिर किया है। जॉर्ज सोरोस को बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद करने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने हेज फंड मैनेजर के रूप में ब्रिटिश करेंसी पाउंड को शॉर्ट कर अरबों का लाभ कमाया था। सोरोस पर भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के भी आरोप लगे हैं।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।