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BJP पर जमकर बरसे कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव भाटिया, कहा कांग्रेस में अब कोई जयचंद नहीं

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मध्यप्रदेश में कांग्रेस अब बीजेपी हमलावर हो गई है। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के नेता और बीजेपी के नेता एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इसी दौरान कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और मध्यप्रदेश के सहप्रभारी शिव भाटिया ने बीजेपी पर हमला बोल दिया है। उन्होंने कई मुद्दों को लेकर बीजेपी को घेरा है और कांग्रेस की सरकार बनने को लेकर दावा किया है।

इसी दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में कितना फर्क है, बात बहुत बड़ी-बड़ी करते हैं और असल में कौन से काम करते हैं। पार्टी भरोसा कर चुनाव लड़ाती है और उसके बाद क्या समझ आता है कि प्रत्याशी का बेटा सरे आम 100 से 150 करोड़ की डील कर रहा है। ऐसे लोगों को आप क्या कहेंगे मुंह में राम बगल में छुरी यह लोग क्या समाज का भला कर सकते हैं। आने वाला वक्त उनके लिए इतना कष्टकारी है कि यह लोग जनता से सबक सीखने के लिए तैयार रहें।

शिव भाटिया ने कहा कि बेरोजगारी को ही ले लीजिए, भ्रष्टाचार तो इतना चरम सीमा पर है कि उसका तो अंत ही नहीं है की कितना भ्रष्टाचार है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि यह मुद्दे तो गढ़ चुके हैं सबके दिमाग के अंदर इन मुद्दों के कारण इन्होंने इतना ज्यादा शोषण किया है

इन्होंने जिस तरीके से वोटों से चुनी हुई सरकार को नोटों से बदला है और लुटेरी सरकार ने जिस तरीके से शोषण किया है जनता अपने मत अधिकार का प्रयोग जो 2018 में किया था उससे ज्यादा बढ़ चढ़कर करेगी उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कर्नाटक से ज्यादा नतीजे आएंगे

इसी दौरान उनसे सवाल पूछा गया कि दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर कहा है कि कांग्रेस को उम्मीद नहीं थी कि सिंधिया परिवार धोखा देगा इसी दौरान सिर्फ भाटिया ने कहा पार्टी ने इसको और इसके पिता को इतना सम्मान दिया जो 1818 से गद्दार थे उनको पार्टी में जगा दी
लेकिन गद्दार गद्दार ही होता है। लोग माफी नहीं करेंगे यह अपने महल से ही नहीं निकल पा रहा है वह कहने को महल है। वह महल अब चबूतरा बन चुका है। देखते जाइए अब क्या होगा इसके साथ यह जनता का निर्णय होगा।

उन्होंने अंत में कहा कि ग्वालियर चंबल संभाग की सभी सीटों में हमारा शानदार प्रदर्शन रहेगा और यह 3 दिसंबर को तय हो जाएगा कि ग्वालियर चंबल क्षेत्र की जनता ने किस तरह से भारतीय जनता पार्टी को नकार दिया है

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।