db News Network

Home » कांग्रेस सेवादल ने आजादी की जंग में और आजादी के बाद दोनों ही जगह अपनी सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाई – लालजी देसाई

कांग्रेस सेवादल ने आजादी की जंग में और आजादी के बाद दोनों ही जगह अपनी सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाई – लालजी देसाई

0 comments 1.7K views 3 minutes read

नई दिल्ली। इस देश में सेवादल का ऐतिहासिक महत्व है, समता मूलक समाज की स्थापना करना इसका मुख्य उद्देश्य रहा है। सेवादल एक सामाजिक संगठन है जो लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद में विश्वास रखता है। सेवादल ने आजादी की जंग में और आजादी के बाद दोनों ही जगह पर अपनी सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाई है। यह कहना है अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई का। आईए आपको बताते हैं लालजी देसाई ने डीबी न्यूज़ नेटवर्क से बातचीत के दौरान क्या कहा।

लालजी देसाई बोले कि गांधी जी के एक आदेश पर सेवादल ने शिक्षा, स्वास्थ्य और जो लोगों की मूलभूत समस्याएं हैं उनको लेकर आजादी के बाद निरंतर कार्य किया है। उन्होंने कहा राहुल जी ने सेवादल के लिए काफी प्रयास किया जिसके बाद से सेवादल में बहुत बदलाव देखने को मिला है। और काफी युवा और महिलाएं हमारे साथ जुड़ी हैं, काफी मजबूत टीम हमारे साथ है। सेवादल में आज यूथ विंग और विमेन विंग जमीनी स्तर पर बेहतर काम कर रहा है।

RSS, BJP और ED पर साधा निशाना
लालजी देसाई ने कहा देश के अंदर दो अलग-अलग विचारधारा के लोग काम कर रहे हैं। आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा सदैव से ही विभाजनकारी रही है। उन्होंने हमेशा लोगों को जाती, धर्म और वर्गों में बांटने का काम किया है यही कारण है की आज वैमनस्यता का भाव बढ़ गया है। आरएसएस ऐसा मानता है कि कुछ जातियों में जन्म लेने के बाद ही आप बहुत बुद्धिमान और सर्वश्रेष्ठ हो बाकी जातियां काम करने के लिए हैं।

आपको बता दें लालजी देसाई मूलतः गुजरात के रहने वाले हैं, वह बोले कि हमारे गुजरात से निकले हुए दो तानाशाह और दो पूंजीपति मित्र देश को जिस प्रकार से लूट रहे हैं यह देखकर मन व्यथित होता है, यह महात्मा गांधी और सरदार पटेल के गुजरात में हम दो, हमारे दो जो मिलकर देश को लूट रहे हैं यह बेहद चिंतनीय भी है, पहले गुजरात को लूट गया था। आज पूरे देश को लूटा जा रहा है। गरीबों से खींचो और अमीरों को सींचो इनकी शैली बन चुकी है। लालजी देसाई ने ED पर भी जमकर हमला बोलते हुए कहा, ED का काम तो अब यह है कि जिस तरह से पहले के महाराजा और राजा के खिलाफ जो आवाज उठाता था उसकी आवाज को दबा दिया जाता था, यही काम आज सरकार के इशारे पर ED कर रही है।

कांग्रेस की सरकार बनने का किया दावा
इस दौरान जब लालजी देसाई से पांच राज्यों में हो रहे चुनाव पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में उत्साह है। और जनता में भी एक अलग उत्साह दिख रहा है। 2024 में कांग्रेस की लहर आना है। जनता परिवर्तन चाह रही है और कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। इसी दौरान उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की लहर बवंडर की तरह आएगी और भाजपा का सुपड़ा साफ हो जाएगा। पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं ऐसे में भाजपा कहीं पर भी सरकार नहीं बना रही है। कांग्रेस का पंजा आपको पांचो राज्यों में दिखाई देगा।

Leave a Comment

चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।