भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में कलह कोई नई बात नहीं है, लेकिन दिल्ली में बैठे शीर्ष नेताओं के लिए यह चिंता का विषय बन गया है। लंबे समय से एमपी कांग्रेस दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है। एक ओर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे सीनियर नेताओं का खेमा है, तो दूसरी ओर युवा नेताओं में शुमार प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की अगुवाई में एक अलग गुट सक्रिय है।
भरी बैठक में खुलकर नाराजगी
सोमवार को आयोजित एक बैठक में कलह खुलकर सामने आ गई। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और मीनाक्षी नटराजन जैसे वरिष्ठ नेताओं ने शिकायत की कि उन्हें पार्टी के अहम फैसलों और बैठकों से दूर रखा जा रहा है। कमलनाथ ने कहा, “पार्टी में ऐसा क्या हो रहा है कि मुझसे कोई राय तक नहीं ली जाती। बैठकों की सूचना तक नहीं दी जाती।”
दिग्विजय सिंह और मीनाक्षी नटराजन ने भी कमलनाथ का समर्थन किया। दिग्विजय ने कहा, “मैं भी सहमत हूं कि बिना एजेंडे के बैठकें बुलाई जा रही हैं। आज की बैठक का एजेंडा मुझे मात्र 6 बजकर 31 मिनट पर मिला।”
कमलनाथ और बीजेपी में जाने की चर्चाएं
पिछले साल विधानसभा चुनाव के बाद कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज थीं। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों के चलते यह संभव नहीं हो सका। अब एक बार फिर कमलनाथ ने पार्टी में हो रही अनदेखी पर सवाल उठाए हैं।
पटवारी ने दी सफाई, लेकिन असंतोष बरकरार
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बैठक में कहा कि सभी निर्णय वरिष्ठ नेताओं से सलाह लेकर ही लिए जा रहे हैं। उन्होंने कमलनाथ से अलग से बात करने की बात कही। हालांकि, सीनियर नेताओं ने पटवारी की सफाई को खोखला बताया।
हर क्षेत्र में गुटबाजी, दिल्ली तक अनसुनी आवाज़ें
पार्टी में गुटबाजी सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं है। मालवा, विंध्य और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में भी यही हाल है। वरिष्ठ नेता बार-बार सीनियर नेताओं की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन दिल्ली नेतृत्व इस पर ध्यान नहीं दे रहा।
एमपी कांग्रेस की मौजूदा स्थिति में अगर गुटबाजी पर काबू नहीं पाया गया, तो आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी को और नुकसान उठाना पड़ सकता है।





