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दिल्ली की इकलौती सीट, कांग्रेस आगे, चेहरा कौन

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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में सत्ता संग्राम जारी है। वहीं, कांग्रेस खाता खोलने में भी संघर्ष करती नजर आ रही है। इधर, विपक्षी गठबंधन INDIA के नेता कांग्रेस पर तंज कस रहे हैं। साथ ही खराब प्रदर्शन की वजह कांग्रेस और आप के अलग लड़ने को बता रहे हैं। ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि भाजपा रुझानों में बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) से राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, ‘भाजपा को हराने के लिए आप भी लड़ती है कांग्रेस भी लड़ती है, लेकिन अलग अलग लड़ती है। अगर एक साथ होते तो दिल्ली का नतीजा पहले एक घंटे में बीजेपी की हार सुनिश्चित हो जाती।’ उन्होंने कांग्रेस को लेकर कहा, ‘कांग्रेस ने खाता खोल दिया बस और क्या है। खाता खोलने के लिए सब मैदान में उतरते हैं।’

जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी दिल्ली चुनाव के नतीजों को लेकर कांग्रेस और आप पर तंज कसा है। उन्होंने कहा, ‘और लड़ो आपस में।’ साथ ही उन्होंने एक जीआईएफ भी शेयर की है। खास बात है कि लोकसभा चुनाव साथ में लड़ने वाली आप और कांग्रेस ने हरियाणा के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव भी अलग लड़ने का फैसला किया था।

दिल्ली विधानसभा की सभी 70 सीटों पर रुझान आ गए हैं। ताजा रुझानों के मुताबिक 9.25 बजे तक भाजपा-47 आप 22 और कांग्रेस एक सीट पर आगे चल रही है। कांग्रेस शुरू से ही बादली सीट पर आगे चल रही है। यहां से दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव लीड बनाए हुए हैं। देवेंद्र यादव कांग्रेस के सीनियर नेता हैं। कई राज्यों के प्रभारी रहें हैं। वह दिल्ली के भलस्वा गांव के रहने वाले हैं और पहले भी विधायक रहे हैं।

देवेंद्र यादव पंजाब के पार्टी प्रभारी हैं। इससे पहले वह उत्तराखंड के भी प्रभारी रह चुके हैं। यादव 2008 से 2013 और 2013 से 2015 तक बादली से कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। हालांकि, पिछले दो चुनावों में इस सीट पर आप की जीत होती रही है। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अजेश यादव पिछले 10 सालों से बादली के विधायक हैं और वह इस बार हैट्रिक लगाने की फिराक में हैं। भाजपा ने दीपक चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। बादली विधानसभा सीट उत्तर-पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट के तटत आता है।

पिछले साल अप्रैल 2024 में अरविंदर सिंह लवली के इस्तीफा देने और भाजपा में शामिल हो जाने के बाद 5 मई को देवेंद्र यादव को दिल्ली कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। बादली सीट के अलावा देवली सीट पर भी कांग्रेस के उम्मीदवार राजेश चौहान बीच-बीच में आगे चल रहे हैं। फिलहाल चुनाव आयोग के आंकड़ों के रुझानों में आम आदमी पार्टी के प्रेम चौहान 3121 वोटों से आगे चल रहे हैं। चुनाव आयोग के ताजा रुझानों के मुताबिक भाजपा 39 और आप 23 सीटों पर आगे चल रही है।

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चंचल गोयल, अभिभावक, ग्वालियर, एमपी

मैंने अपने 15 साल के शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर देखा है कि प्राइमरी टीचर्स की बॉन्डिंग बच्चों के साथ बहुत अच्छी होती है।  यह उम्र के बच्चे अपने टीचर्स को फॉलो करते हैं और पेरेंट्स से भी लड़ जाते हैं। इसलिए, स्कूल और टीचर्स पर बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को खुश रखें।

अगर बच्चा अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो पेरेंट्स उसे अपना हक मान लेते हैं। पेरेंट्स को विश्वास करना चाहिए कि जिस स्कूल में उन्होंने दाखिला कराया है, वह बच्चों के लिए सही है। लेकिन अपने बच्चों का रिजल्ट किसी और के बच्चे से कंपेयर नहीं करना चाहिए। आजकल के पेरेंट्स समझदार हैं और जानते हैं कि बच्चों को कैसी शिक्षा देनी है। किसी भी समस्या के लिए वे सीधे टीचर से बात कर सकते हैं, जिससे समस्या का समाधान जल्दी हो सके।

प्रियंका जैसवानी चौहान, हेड मिस्ट्रेस, बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, ग्वालियर, एमपी

जुलाई का सत्र बच्चों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सबसे बड़ा वेकेशन होता है।  पेरेंट्स को बच्चों की लास्ट सेशन की पढ़ाई का रिवीजन कराना चाहिए ताकि वे आउट ऑफ रेंज न हो जाएं। शुरुआती अध्याय बच्चों की रुचि को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होते हैं।

आगे वे कहते हैं कि प्रेशर का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों प्रभाव होते हैं। आज की युवा पीढ़ी में 99% लोग बिजनेस और स्टार्टअप्स शुरू कर रहे हैं। पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालना गलत है, लेकिन भविष्य के लिए यह लाभदायक हो सकता है। बच्चों को गैजेट्स का सही उपयोग आना चाहिए, लेकिन उन पर पूर्णतः निर्भर होना गलत है।

तुषार गोयल, एचओडी इंग्लिश, बोस्टन पब्लिक स्कूल, आगरा, यूपी

वेकेशंस के दौरान बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह नहीं हटानी चाहिए। स्कूल द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को धीरे-धीरे  करने से पढ़ाई का दबाव नहीं बनता। जब पढ़ाई फिर से शुरू होती है, तो बच्चों को अधिक दबाव महसूस नहीं होता। आजकल स्कूल बहुत मॉडर्नाइज हो गए हैं जिससे बच्चों को हेल्दी एटमॉस्फियर और खेल-खेल में सीखने को मिलता है।

एडमिनिस्ट्रेशन को बुक्स का टाइम टेबल सही तरीके से बनाना चाहिए ताकि बच्चों पर वजन कम पड़े। स्कूल में योग और एक्सरसाइज जैसी गतिविधियाँ भी शुरू होनी चाहिए ताकि बच्चे फिट रहें और उन्हें बैक प्रेशर न हो। टीचर और पेरेंट्स के बीच का कम्यूनिटेशन गैप काम होना चाहिए। बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूल में करें जिसका रिजल्ट अच्छा हो, भले ही उसका नाम बड़ा न हो।

डॉ. नेहा घोडके, अभिभावक, ग्वालियर, एम

बच्चों को पढ़ाई की शुरुआत खेलते-कूदते करनी चाहिए ताकि उन्हें बोझ महसूस न हो। पेरेंट्स की अपेक्षाएं आजकल बहुत बढ़ गई हैं,  लेकिन हर बच्चा समान नहीं होता। बच्चों को अत्यधिक दबाव में न डालें, ताकि वे कोई गलत कदम न उठाएं। वे आगे कहती हैं कि आजकल बच्चे दिनभर फोन का उपयोग करते रहते हैं, और पेरेंट्स उन्हें फोन देकर उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं। पेरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें कम से कम समय के लिए फोन देना चाहिए।

दीपा रामकर, टीचर, माउंट वर्ड स्कूल, ग्वालियर, एमपी

हमारे स्कूल में पारदर्शिता पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल के समय में पेरेंट्स अपने काम में व्यस्त रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर समय कम दे पाते हैं। स्कूल द्वारा टेक्नोलॉजी की मदद से बच्चों का होमवर्क पेरेंट्स तक पहुँचाया जाता है ताकि वे बच्चों पर ध्यान दे सकें।

पेरेंट्स को बच्चों को गैजेट्स देते वक्त ध्यान रखना चाहिए की वह उसका कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मोबाइल का कम से कम उपयोग करने देना चाहिए। अगर आप अपने बच्चों के सामने बुक रीड करेंगे तो बच्चा भी बुक रीड करने के लिए प्रेरित होगा।

दीक्षा अग्रवाल, टीचर, श्री राम सेंटेनियल स्कूल, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।

अंकिता राणा, टीजीटी कोऑर्डिनेटर, बलूनी पब्लिक स्कूल, दयालबाग, आगरा, यूपी

वर्तमान समय में बच्चों को पढ़ाने की तकनीक में बदलाव आया है, आजकल थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल बेस्ड लर्निंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। आजकल पेरेंट्स भी पहले से बेहद अवेयर हैं, क्योंकि अब बच्चों के करियर पॉइंट ऑफ व्यू से कई विकल्प हमारे सामने होते हैं जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ प्रॉपर कम्युनिकेट करें।